बांग्लादेश के नए सुल्तान का राजतिलक, क्या भारत के साथ रिश्तों में जमेगी नई बर्फ?

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संवाद 24 नई दिल्ली। दक्षिण एशिया की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। बांग्लादेश में मचे लंबे सियासी घमासान और 18 महीने की अंतरिम सरकार के कार्यकाल के बाद आज ढाका के राष्ट्रीय संसद भवन का ‘साउथ प्लाजा’ एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनेगा। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान आज बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इस समारोह में भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

पीएम मोदी की जगह क्यों जा रहे हैं ओम बिरला?
बांग्लादेश सरकार ने इस खास मौके के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक निमंत्रण भेजा था। हालांकि, कूटनीतिक व्यस्तताओं और मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ पूर्व निर्धारित बैठक के कारण पीएम मोदी इस समारोह में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। भारत ने अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ यानी ‘पड़ोसी पहले’ की नीति को कायम रखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजने का निर्णय लिया है। जानकारों का मानना है कि बिरला की मौजूदगी भारत-बांग्लादेश के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान और गहरी दोस्ती का एक सशक्त संदेश है।

35 साल बाद बांग्लादेश को मिलेगा ‘पुरुष प्रधानमंत्री’
यह खबर केवल सत्ता परिवर्तन की नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की भी है। बांग्लादेश के पिछले साढ़े तीन दशकों के इतिहास पर नजर डालें, तो सत्ता की कमान ‘दो बेगमों’ (शेख हसीना और खालिदा जिया) के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है। करीब 35 साल बाद यह पहला मौका होगा जब कोई पुरुष प्रधानमंत्री देश की बागडोर संभालेगा। तारिक रहमान, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं, एक लंबे निर्वासन और संघर्ष के बाद इस मुकाम पर पहुंचे हैं। उनकी पार्टी बीएनपी ने हालिया चुनावों में 300 में से 209 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल कर स्पष्ट जनादेश प्राप्त किया है।

क्या बदलेगा भारत के लिए?
तारिक रहमान के सत्ता में आने को लेकर भारतीय गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं। बीएनपी का पिछला कार्यकाल भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहा था। हालांकि, हाल के दिनों में तारिक रहमान और उनके प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे भारत के साथ रचनात्मक और संतुलित संबंध चाहते हैं। पीएम मोदी ने भी चुनाव परिणाम आने के बाद रहमान को फोन पर बधाई देकर सकारात्मक शुरुआत के संकेत दिए हैं। इस शपथ ग्रहण समारोह में न केवल भारत, बल्कि चीन, सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्किये और श्रीलंका समेत 13 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि पूरी दुनिया की नजरें बांग्लादेश की इस नई लोकतांत्रिक शुरुआत पर टिकी हैं।

चुनौतियों का पहाड़ और नई उम्मीदें
तारिक रहमान के सामने चुनौतियों का बड़ा पहाड़ खड़ा है। मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान देश ने आर्थिक अस्थिरता और कट्टरपंथ की लहर देखी है। अब एक निर्वाचित सरकार से जनता को उम्मीद है कि वह देश में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द वापस लाएगी। विशेष रूप से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय रही है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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