महाशिवरात्रि पर कन्नौज के मंदिरों में आस्था का सैलाब, गौरीशंकर मंदिर बना आकर्षण का केंद्र
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संवाद 24 संवाददाता। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जनपद के प्राचीन बाबा गौरीशंकर मंदिर में भव्य धार्मिक आयोजन किया गया, जहां भगवान शिव का 10 कुंतल फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। श्रृंगार में कमल, गुलाब और गेंदा सहित विभिन्न प्रकार के फूलों का उपयोग किया गया। मंदिर समिति के अनुसार शिवलिंग का दिन में तीन अलग-अलग समय पर श्रृंगार किया जाएगा।
श्रृंगार से पूर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत स्वयंभू शिवलिंग पर हल्दी का लेप लगाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई इस पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार हल्दी का लेप सौभाग्य, समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है, इसलिए विशेष रूप से महिलाओं ने परिवार की खुशहाली की कामना के साथ हल्दी अर्पित की।
मुख्य पुजारी अनिरुद्ध दीक्षित ने बताया कि महाशिवरात्रि से पहले भगवान शिव को हल्दी अर्पित करने की परंपरा अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस अवसर पर लगभग एक लाख रुपये मूल्य के फूलों से मंदिर परिसर को सजाया गया है। सुबह से ही मंदिर में घंटा-घड़ियाल और “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ भक्ति-मय वातावरण बना रहा तथा दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि बाबा गौरीशंकर मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू है और जमीन में काफी गहराई तक स्थापित है, जिसके कारण इस मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता है।
इसी क्रम में चौधरियापुर गांव स्थित प्राचीन टीले पर विराजमान बाबा विश्वनाथ मंदिर में भी महाशिवरात्रि के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। ऐतिहासिक मान्यता है कि 11वीं सदी में आल्हा-ऊदल भी यहां प्रतिदिन दर्शन करने आते थे, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।





