उज्जैन से काशी तक गूंजा ‘हर हर महादेव’ ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए उमड़ा आस्था का महासागर
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संवाद 24 नई दिल्ली। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानी महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आज समूचा भारत भक्ति के रंग में सराबोर है। देश के कोने-कोने से ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष सुनाई दे रहे हैं। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है। सुबह के ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिरों के बाहर मील लंबी कतारें लगी हैं, जहां श्रद्धालु अपने आराध्य देव महादेव की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं।
महाकाल की नगरी में भस्म आरती का वैभव
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि का उत्सव दिव्य रहा। यहां भगवान महाकाल की ‘भस्म आरती’ विशेष आकर्षण का केंद्र बनी। मंदिर के कपाट तड़के ही खोल दिए गए थे, जिसके बाद भगवान शिव का पंचामृत अभिषेक किया गया। भांग, चंदन और सूखे मेवों से बाबा का अद्भुत श्रृंगार किया गया। महाकाल मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े हैं और प्रशासन ने दर्शन के लिए ‘सुगम दर्शन’ व्यवस्था लागू की है।
काशी विश्वनाथ में आस्था की गंगा
उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी वाराणसी (काशी) में बाबा विश्वनाथ के दरबार में भक्तों की भारी भीड़ जुटी है। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बाबा का जलाभिषेक कर रहे हैं। मंदिर परिसर को फूलों और बिजली की लड़ियों से भव्य तरीके से सजाया गया है। काशी की गलियों में डमरूओं की गूंज और शिवभक्तों का उत्साह यह बता रहा है कि आज शिव और शक्ति के मिलन का उत्सव चरम पर है।
सोमनाथ और ओंकारेश्वर में भी उमड़ा जनसैलाब
गुजरात के सोमनाथ मंदिर में भी सुबह से ही विशेष ‘मंगला आरती’ का आयोजन किया गया। अरब सागर के तट पर स्थित इस प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। वहीं, मध्य प्रदेश के खंडवा स्थित ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंगों में भी श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी में स्नान कर भगवान शिव को बेलपत्र और जल अर्पित किया।
दक्षिण से उत्तर तक शिव भक्ति की लहर
तमिलनाडु के कोयंबटूर में स्थित ईशा योग केंद्र में भी महाशिवरात्रि का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जहां रात भर चलने वाले सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में लाखों लोग शामिल हो रहे हैं। उत्तराखंड के केदारनाथ धाम (जो वर्तमान में शीतकाल के कारण बंद है, लेकिन उत्सव मनाया जा रहा है) से लेकर झारखंड के देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम) तक, हर तरफ केवल महादेव की महिमा का गुणगान हो रहा है।
महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि वह रात है जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। आध्यात्मिक दृष्टि से इसे प्रकृति और पुरुष के मिलन का दिन माना जाता है। आज के दिन शिव भक्त व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर शिव साधना में लीन रहते हैं। मंदिरों में चार प्रहर की पूजा का विशेष विधान है, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक किया जाता है। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। बड़े मंदिरों में सीसीटीवी और ड्रोन के जरिए भीड़ पर नजर रखी जा रही है। जगह-जगह भंडारों और जल सेवा की व्यवस्था की गई है। आज का दिन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकता और अटूट विश्वास का भी दर्शन कराता है।






