अमेरिका में ट्रम्प का बड़ा दांव: अब बिना ‘आईडी कार्ड’ नहीं डलेगा वोट, क्या पलटने वाली है दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र की तस्वीर?
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संवाद 24 नई दिल्ली । संयुक्त राज्य अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सत्ता संभालते ही अपने सबसे बड़े और विवादित चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। ट्रम्प ने घोषणा की है कि वह आगामी ‘मिडटर्म इलेक्शन’ (मध्यावधि चुनाव) से पहले देश में ‘वोटर आईडी’ अनिवार्य करने के लिए एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) जारी करने जा रहे हैं। इस फैसले ने न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया के राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
चुनावी शुचिता या राजनीतिक रणनीति?
व्हाइट हाउस से जारी संकेतों के अनुसार, इस आदेश का मुख्य उद्देश्य चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता लाना और अवैध मतदान को रोकना है। राष्ट्रपति ट्रम्प का मानना है कि बिना पहचान पत्र के मतदान होने से चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा है कि “यदि आपको एक साधारण बैंक खाता खोलने या हवाई जहाज में चढ़ने के लिए पहचान पत्र की आवश्यकता होती है, तो देश का भविष्य तय करने वाले मतदान के लिए यह अनिवार्य क्यों नहीं होना चाहिए?”
विपक्ष और नागरिक अधिकार समूहों में खलबली
ट्रम्प के इस कदम ने अमेरिका में एक नई कानूनी और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी और कई नागरिक अधिकार संगठनों ने इस फैसले का कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि यह आदेश उन गरीब, अल्पसंख्यक और ग्रामीण मतदाताओं को वोट डालने से रोकेगा जिनके पास आधिकारिक पहचान पत्र बनवाने के संसाधन नहीं हैं। आलोचकों का कहना है कि यह ‘वोटर दमन’ (Voter Suppression) की एक चाल है, जो आने वाले मध्यावधि चुनावों के नतीजों को प्रभावित कर सकती है।
कानूनी लड़ाई के आसार
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्यकारी आदेश जारी होते ही अमेरिकी अदालतों में इसे चुनौती दी जाएगी। अमेरिका के कई राज्यों में मतदान के नियम अलग-अलग हैं, और राष्ट्रपति का केंद्र से ऐसा आदेश थोपना संघीय ढांचे (Federal Structure) के खिलाफ माना जा सकता है। क्या ट्रम्प का यह आदेश कानूनी कसौटी पर खरा उतरेगा या न्यायपालिका इस पर रोक लगा देगी, यह आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा।
वैश्विक लोकतंत्र पर असर
अमेरिका को दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र माना जाता है, और वहां की चुनाव प्रक्रिया में होने वाला कोई भी बदलाव दूसरे देशों के लिए भी एक नजीर बनता है। यदि अमेरिका में वोटर आईडी अनिवार्य होती है, तो यह वैश्विक स्तर पर चुनावी सुधारों की एक नई लहर पैदा कर सकता है। भारत जैसे देशों में पहले से ही फोटो पहचान पत्र अनिवार्य हैं, लेकिन अमेरिका जैसे देश में जहां ‘पर्सनल लिबर्टी’ को सर्वोपरि रखा जाता है, वहां यह बदलाव किसी क्रांति से कम नहीं है।






