बांग्लादेश चुनाव में गूंजा ‘हिंदू’ नाम! बीएनपी की प्रचंड जीत के बीच इन 3 हिंदू सांसदों ने रचा इतिहास, जानें कौन हैं ये दिग्गज
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संवाद 24 नई दिल्ली । पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुए हालिया आम चुनावों ने न केवल वहां की सत्ता का रुख बदल दिया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा को भी जन्म दे दिया है। इस चुनाव में तारिक रहमान की अगुवाई वाली ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (बीएनपी) ने 211 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत हासिल किया है। लेकिन इस चुनावी महासमर की सबसे बड़ी और सुखद खबर अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व को लेकर आई है। बीएनपी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले तीन प्रमुख हिंदू उम्मीदवारों ने शानदार जीत दर्ज कर संसद (जातीय संसद) की दहलीज पर कदम रखा है।
लोकतंत्र की जीत: तीनों हिंदू सांसद बीएनपी से
बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में यह चुनाव कई मायनों में अलग रहा। एक तरफ जहां मुख्य प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी को केवल 68 सीटों पर संतोष करना पड़ा, वहीं बीएनपी के खेमे में अल्पसंख्यकों का दबदबा साफ दिखाई दिया। दिलचस्प बात यह है कि इस बार संसद पहुंचने वाले तीनों हिंदू चेहरे बीएनपी के कद्दावर नेता हैं।
गायेश्वर चंद्र रॉय: ढाका की धरती पर लहराया जीत का परचम
हिंदू सांसदों की इस फेहरिस्त में सबसे कद्दावर नाम गायेश्वर चंद्र रॉय का है। बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य और पूर्व राज्य मंत्री गायेश्वर ने ढाका-3 निर्वाचन क्षेत्र से ताल ठोंकी थी। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार मोहम्मद शाहीनुर इस्लाम को 15,899 वोटों के भारी अंतर से धूल चटाई। गायेश्वर चंद्र रॉय को कुल 99,163 वोट मिले। उनकी यह जीत बताती है कि बांग्लादेश की राजधानी के वोटरों ने अनुभव और समावेशी राजनीति पर भरोसा जताया है।
निताई रॉय चौधरी: मगुरा की सीट पर जमात को दी शिकस्त
बीएनपी के उपाध्यक्ष निताई रॉय चौधरी ने मगुरा-2 संसदीय क्षेत्र से अपनी जीत दर्ज की है। अल्पसंख्यक समुदाय के बीच एक बेहद प्रभावशाली चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले निताई रॉय को कुल 1,47,896 वोट प्राप्त हुए। उन्होंने जमात के उम्मीदवार मुस्तर्शीद बिल्लाह को 30,838 वोटों के अंतर से हराया। निताई रॉय चौधरी की जीत को बीएनपी के भीतर हिंदू समुदाय के बढ़ते भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है।
एडवोकेट दीपेन दीवान: रंगमती की पहाड़ियों से संसद तक का सफर
तीसरे विजयी उम्मीदवार एडवोकेट दीपेन दीवान हैं, जिन्होंने रंगमती संसदीय सीट से शानदार जीत हासिल की। दीपेन दीवान को 31,222 वोट मिले। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार पहल चकमा को 9,678 वोटों के अंतर से मात दी। दुर्गम क्षेत्रों और जातीय विविधता वाले इस इलाके में दीपेन की जीत बीएनपी की जमीनी पकड़ को मजबूती देती है।
जमात के हिंदू दांव का क्या हुआ?
जहाँ बीएनपी के तीनों हिंदू उम्मीदवारों ने जीत का स्वाद चखा, वहीं जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन का एकमात्र हिंदू दांव फेल हो गया। जमात ने खुलना-1 सीट से कृष्णा नंदी को मैदान में उतारा था। कृष्णा नंदी ने 70,346 वोट हासिल कर कड़ी टक्कर तो दी, लेकिन अंततः उन्हें बीएनपी के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा।
नया बांग्लादेश और भारत के साथ संबंध
बीएनपी की इस शानदार वापसी और हिंदू सांसदों के निर्वाचन के बाद अब सबकी नजरें आगामी विदेश नीति पर टिकी हैं। जानकारों का मानना है कि संसद में हिंदू सांसदों की मौजूदगी भारत और बांग्लादेश के बीच मधुर संबंधों को बनाए रखने में एक सेतु का काम करेगी। 20 साल के लंबे वनवास के बाद सत्ता में लौटे तारिक रहमान के लिए यह जीत केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि विश्वास की भी जीत है।बांग्लादेश की यह नई राजनैतिक तस्वीर साफ कर रही है कि वहां की जनता अब कट्टरपंथ के बजाय विकास और सभी समुदायों को साथ लेकर चलने वाली राजनीति की ओर कदम बढ़ा रही है।






