ब्रह्मपुत्र की लहरों पर इंजीनियरिंग का चमत्कार: PM मोदी ने असम को दी 5450 करोड़ की सौगात, अब 7 मिनट में पूरा होगा घंटों का सफर

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संवाद 24 असम। पूर्वोत्तर भारत के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम के गुवाहाटी में ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ का भव्य उद्घाटन किया। ब्रह्मपुत्र नदी के विशाल पाट पर बना यह पुल न केवल आधुनिक इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना है, बल्कि यह असम की जीवनरेखा बनने जा रहा है। लगभग 3,030 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह छह-लेन का पुल गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच की दूरी को इस कदर समेट देगा कि जिस सफर में पहले घंटों लगते थे, वह अब मात्र 7 मिनट में पूरा हो सकेगा। प्रधानमंत्री ने इस दौरान केवल पुल ही नहीं, बल्कि कुल 5,450 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में कनेक्टिविटी, डिजिटल बुनियादी ढांचा, उच्च शिक्षा और शहरी परिवहन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।

इंजीनियरिंग का अजूबा: ‘एक्स्ट्राडोज्ड’ तकनीक से बना पहला पुल
कुमार भास्कर वर्मा सेतु की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निर्माण तकनीक है। यह पूर्वोत्तर भारत का पहला ‘एक्स्ट्राडोज्ड’ (Extradosed) प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट पुल है। यह तकनीक केबल-स्टेड और गर्डर ब्रिज का एक हाइब्रिड रूप है, जो पुल को अतिरिक्त मजबूती और स्थायित्व प्रदान करती है। 1.24 किलोमीटर लंबे इस मुख्य पुल और कुल 8.4 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील (Seismic Zone 5) क्षेत्र होने के कारण विशेष सुरक्षा मानकों के साथ बनाया गया है। इसमें ‘फ्रिक्शन पेंडुलम बियरिंग्स’ का उपयोग किया गया है, जो किसी भी बड़े भूकंपीय झटके को सोखने की क्षमता रखते हैं।

रणनीतिक मजबूती: डिब्रूगढ़ में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF)
गुवाहाटी पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री डिब्रूगढ़ के मोरान बाईपास पहुंचे, जहां उन्होंने देश की पहली ऐसी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का निरीक्षण किया जो नेशनल हाईवे पर बनाई गई है। यह 4.2 किलोमीटर लंबी पट्टी भारतीय वायुसेना के समन्वय से तैयार की गई है। यहाँ प्रधानमंत्री ने सुखोई और राफेल जैसे लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों का हवाई प्रदर्शन देखा। यह रनवे प्राकृतिक आपदाओं या युद्ध जैसी स्थितियों में सैन्य और नागरिक विमानों की लैंडिंग के लिए एक रणनीतिक संपत्ति साबित होगा।

शिक्षा और डिजिटल इंडिया को मिली रफ़्तार
कनेक्टिविटी के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने ज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाए। उन्होंने ‘IIM गुवाहाटी’ के अस्थायी परिसर और ‘उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय डेटा केंद्र’ (National Data Centre) का भी उद्घाटन किया। यह डेटा सेंटर न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर के सरकारी विभागों के लिए मिशन-क्रिटिकल डेटा को होस्ट करेगा और डिजिटल इंडिया अभियान को सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाएगा।

प्रदूषण मुक्त सफर: 225 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी
शहरी गतिशीलता को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से पीएम मोदी ने ‘पीएम-ईबस सेवा’ योजना के तहत 225 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें से 100 बसें अकेले गुवाहाटी के लिए हैं, जबकि बाकी नागपुर, भावनगर और चंडीगढ़ के लिए आवंटित की गई हैं। इससे असम के लाखों नागरिकों को स्वच्छ और किफायती परिवहन की सुविधा मिलेगी।

विकास का नया अध्याय
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर अब देश के विकास का ‘अष्टलक्ष्मी’ इंजन बन चुका है। उन्होंने जोर दिया कि ये बुनियादी ढांचे केवल कंक्रीट के ढांचे नहीं हैं, बल्कि ये असम के लोगों के सपनों और उनकी मेहनत का परिणाम हैं। कुमार भास्कर वर्मा सेतु के शुरू होने से न केवल आम जनता को राहत मिलेगी, बल्कि आईआईटी गुवाहाटी और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों तक पहुंच भी सुगम होगी, जिससे इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मौके पर प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य अब बुनियादी ढांचे के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा हो रहा है। यह पुल 1 मार्च से पूरी तरह से सभी प्रकार के वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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