महाशिवरात्रि साधना विधि (घर पर करने योग्य)
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संवाद 24 आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री।
समय
महाशिवरात्रि की रात्रि (रात 9 बजे से सुबह 4 बजे तक श्रेष्ठ)
विशेष रूप से निशिता काल (12 से 3 बजे) सबसे उत्तम
तैयारी
- दिनभर सात्विक भोजन करें (फलाहार उत्तम)
- ब्रह्मचर्य का पालन करें
- स्नान कर साफ सफेद या केसरिया वस्त्र पहनें
- पूजा स्थान साफ करें, दीपक जलाएँ
सामग्री
शिवलिंग या चित्र
गंगाजल / शुद्ध जल
दूध, दही, शहद, घी, शक्कर (पंचामृत)
बेलपत्र, धतूरा, भांग
धूप, दीप, अगरबत्ती
रुद्राक्ष माला
विधि
1️⃣ संकल्प
हाथ में जल लेकर कहें:
“ॐ नमः शिवाय। हे महादेव, मैं आपकी कृपा हेतु यह साधना कर रहा हूँ, इसे सफल करें।”
2️⃣ अभिषेक
शिवलिंग पर क्रम से चढ़ाएँ:
जल → दूध → दही → शहद → घी → पुनः जल
अंत में गंगाजल
हर बार “ॐ नमः शिवाय” जप करें।
3️⃣ पूजन
बेलपत्र अर्पित करें (3 पत्तों वाला उत्तम)
फूल, धूप, दीप चढ़ाएँ
4️⃣ मंत्र जप
कम से कम 5 माला (540 जप) करें:
👉 ॐ नमः शिवाय॥
या
👉 महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्…
5️⃣ रुद्राभिषेक (यदि संभव हो)
रुद्राष्टाध्यायी पाठ करें।
6️⃣ रात्रि जागरण
भजन, ध्यान, मौन, या जप में रात्रि बिताएँ।
विशेष शिवरात्रि तांत्रिक साधना (उन्नति हेतु) (केवल श्रद्धा और संयम के साथ)
यदि आप गहरी साधना करना चाहते हैं:
काले वस्त्र पहनें
दक्षिण दिशा में मुख करके बैठें
11 माला “ॐ नमः शिवाय”
अंत में शिव को काले तिल अर्पित करें
(यह साधना केवल शुद्ध मन से करें, दिखावे हेतु नहीं)
सावधानियाँ
❌ शराब, मांस, तंबाकू से दूर रहें
❌ क्रोध, झूठ, निंदा से बचें
❌ भय या लालच से साधना न करें
फल
✔ मन की शांति
✔ कष्टों का नाश
✔ रोगों में राहत
✔ आध्यात्मिक उन्नति
✔ मनोकामना पूर्ति
जो साधक भगवान शिव की विशेष साधना करना चाहते हैं या अपना दरबार प्रारंभ करना चाहते हैं, उनके लिए शुभ अवसर उपलब्ध है। महाशिवरात्रि एवं अमावस्या के पावन अवसर पर
विशेष शिव साधना प्रारंभ कराई जा रही है।
इस साधना के माध्यम से:
✔ सिद्धि प्राप्ति
✔ आत्मबल में वृद्धि
✔ साधना में सफलता
✔ आध्यात्मिक उन्नति
✔ दरबार स्थापना में मार्गदर्शन
केवल श्रद्धा और नियमों के साथ योग्य साधकों को ही प्रवेश दिया जाएगा।







