महाशिवरात्रि 2026: 300 साल बाद बन रहा दुर्लभ ‘महा-संयोग’ शिव-शक्ति के मिलन की महानिशा
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संवाद 24 आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री। साल 2026 की महाशिवरात्रि ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत असाधारण होने वाली है। 15 फरवरी 2026 को पड़ने वाला यह महापर्व न केवल शिव-शक्ति के विवाह का उत्सव है, बल्कि खगोलीय गणनाओं के अनुसार करीब 300 वर्षों के बाद एक ऐसा दुर्लभ ग्रह-नक्षत्र संयोग बना रहा है, जो साधकों और भक्तों के लिए सिद्धियों के द्वार खोल देगा।
खगोलीय महा-संयोग और ज्योतिषीय विश्लेषण
इस वर्ष महाशिवरात्रि पर एक साथ 8 शुभ योग बन रहे हैं, जिसमें बुधादित्य, शुक्रादित्य और लक्ष्मी नारायण राजयोग मुख्य हैं।
- महालक्ष्मी राजयोग: 16 फरवरी को चंद्रमा मकर राशि में प्रवेश करेंगे जहां मंगल पहले से विराजमान हैं। मंगल और चंद्र की यह युति ‘महालक्ष्मी राजयोग’ का निर्माण करेगी, जो धन और प्रगति के लिए अत्यंत शुभ है।
- विशेष नक्षत्र: यह शिवरात्रि श्रवण नक्षत्र में पड़ रही है, जो भगवान शिव का अत्यंत प्रिय नक्षत्र माना जाता है।
- भाग्यशाली राशियाँ: इस दुर्लभ संयोग से मेष, वृषभ, कन्या, मकर और कुंभ राशि के जातकों को करियर और आर्थिक क्षेत्र में जबरदस्त लाभ मिलने के संकेत हैं।
पूजन मुहूर्त और चार प्रहर की पूजा (15-16 फरवरी)
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे शुरू होगी और 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे समाप्त होगी। रात्रि व्यापिनी तिथि होने के कारण महाशिवरात्रि का मुख्य व्रत और पूजन 15 फरवरी को ही किया जाएगा।
चार प्रहर पूजन समय ( IST – नई दिल्ली):
- प्रथम प्रहर: 15 फरवरी, शाम 06:11 बजे से रात 09:23 बजे तक।
- द्वितीय प्रहर: 15 फरवरी, रात 09:23 बजे से 16 फरवरी, 12:35 AM तक।
- तृतीय प्रहर: 16 फरवरी, 12:35 AM से सुबह 03:47 AM तक।
- चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी, सुबह 03:47 AM से सुबह 06:59 AM तक।
- निशिता काल (सबसे शक्तिशाली समय): 16 फरवरी की रात 12:09 AM से 01:01 AM तक (कुल 52 मिनट), जब शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे।
- पारण समय: 16 फरवरी को सुबह 06:59 AM से दोपहर 03:24 बजे के बीच।
प्रयागराज माघ मेला: कल्पवास की पूर्णाहुति
प्रयागराज में चल रहे 44 दिवसीय माघ मेले का अंतिम और छठा मुख्य स्नान पर्व भी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर संपन्न होगा। इस दिन त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है और कल्पवासियों के संकल्प की पूर्णाहुति होती है।
शास्त्रसम्मत पूजन विधि और अचूक उपाय
आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री के अनुसार, शिव को प्रसन्न करने के लिए तामझाम से अधिक ‘भाव’ की आवश्यकता है:
- क्या अर्पण करें: 11 बेलपत्र (चिकना हिस्सा नीचे की ओर), धतूरा, भांग और शमी के फूल अर्पण करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
- राशि अनुसार अभिषेक: मेष को बेलपत्र, वृषभ को दूध, मिथुन को दही, और सिंह को घी का दीया जलाना विशेष फलदायी रहेगा।
- सावधानी: पूजा में केतकी, तुलसी और हल्दी का प्रयोग वर्जित है। व्रत के दौरान चावल और भारी अनाज का त्याग कर फलाहार (साबूदाना, फल, दूध) ग्रहण करें।
कालोपदेश (आचार्य की वाणी)
“शिवरात्रि केवल रात्रि जागरण नहीं, बल्कि चेतना का जागरण है। जब चंद्रमा (मन) क्षीण होता है, तब शिव तत्व (आत्मा) का प्रकाश सबसे तीव्र होता है। इस 15 फरवरी को मौन और ध्यान के माध्यम से स्वयं के भीतर के शिव को खोजें।







