धरती माता बचाओ अभियान: नैनो यूरिया व जैविक खाद के प्रयोग को बढ़ाने की रणनीति तय

संवाद 24 संवाददाता। जनपद में खेती को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में प्रशासन ने ठोस पहल शुरू कर दी है। जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में धरती माता बचाओ अभियान के अंतर्गत जनपद स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और नैनो उर्वरक व जैविक खाद को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में उप कृषि निदेशक ने अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की सेहत सुधारना और लागत घटाते हुए किसानों की आय बढ़ाना है। इसके लिए नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, विभिन्न कल्चर, फसल अवशेष प्रबंधन तथा जैविक व हरी खाद के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रशासन द्वारा व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाकर किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुँचाने की योजना बनाई गई है।

सहायक आयुक्त सहकारिता एवं इफको प्रतिनिधि ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के प्रयोग की कार्ययोजना रखी। जिला उद्यान अधिकारी ने इसके तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी और बताया कि इन उर्वरकों का कम मात्रा में उपयोग भी फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध करा सकता है।

पर्यावरणविद् गुंजा जैन ने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मृदा की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की चर्चा करते हुए कहा कि संतुलित पोषण प्रबंधन ही टिकाऊ खेती का आधार है। उन्होंने जैविक खाद और फसल अवशेष प्रबंधन को दीर्घकालिक समाधान बताया।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अभियान को सफल बनाने के लिए सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करें। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और विभिन्न कल्चर के लाभ तथा इनके उपयोग में आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों का समाधान किसानों तक पहुँचाया जाए। इसके लिए सोशल मीडिया, गोष्ठियों और पम्पलेट के माध्यम से जानकारी प्रसारित की जाएगी।

साथ ही, जायद मौसम में चयनित गांवों में किसानों के खेतों पर प्रदर्शन आयोजित करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसान प्रत्यक्ष रूप से परिणाम देख सकें और अन्य कृषकों को भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।
बैठक में जिला विकास अधिकारी, उप कृषि निदेशक, कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक, सहायक आयुक्त सहकारिता, जिला आपूर्ति अधिकारी, पर्यावरणविद् गुंजा जैन, इफको प्रतिनिधि तथा उर्वरक व्यवसायी उपस्थित रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि नैनो उर्वरकों और जैविक खाद के संतुलित उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी, लागत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। प्रशासन की यह पहल खेती को रसायन-निर्भरता से निकालकर टिकाऊ कृषि की ओर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Anuj Singh
Anuj Singh

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