“डॉक्टर की पर्ची से बाहर: कैसे बिना प्रिस्क्रिप्शन एंटीबायोटिक्स भारत में AMR का नया खतरा बन रहे हैं?”
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत की राजधानी नई दिल्ली में एक बेहद खतरनाक स्वास्थ्य संकट की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। घरेलू उपयोग से लेकर मेडिकल स्टोर तक, एंटीबायोटिक्स अब बिना डॉक्टर की पर्ची के लगभग खुली दुकानों की तरह बिक रहे हैं — और इसका सीधा परिणाम है एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का बढ़ता खतरनाक प्रकोप।
AMR क्या है — और क्यों सच में खतरनाक
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) वह स्थिति है जब बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव उन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं जिनका इस्तेमाल उन्हें मारने के लिए किया जाता है। इसका अर्थ यह है कि पहले आसानी से ठीक होने वाली संक्रमणें अब इलाज के लिए प्रतिरोधक बन सकती हैं — एक ऐसी चुनौती जो WHO ने दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में से एक कहा है।
मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक्स खरीदना आसान
नई दिल्ली में नियमों के बावजूद कई मेडिकल स्टोर बिना डॉक्टर पर्ची के एंटीबायोटिक दवाएँ बेच रहे हैं। आम एलर्जी, खांसी या वायरल जैसी सामान्य शिकायतों में भी लोग और कई बार डॉक्टर खुद ओटीसी दवाओं का सुझाव देते हैं। यह स्थिति इसलिए और गंभीर है क्योंकि दवाओं के इस ‘मुफ़्त’ और अनियंत्रित उपयोग से शरीर में बैक्टीरिया तेजी से उन दवाओं के खिलाफ अनुकूलन कर लेते हैं — जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है।
खुद से दवा लेना — एक आम प्रवृत्ति
एक बड़े हिस्से की आबादी खुद से या सलाह के बिना एंटीबायोटिक्स लेने लगी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह प्रवृत्ति सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है — देशभर में लोग तेज़ी से दवाइयाँ लेना सीख रहे हैं, जो अक्सर संक्रमण के इलाज की उचित पद्धति नहीं है। इसके परिणामस्वरूप स्थानीय स्तर पर प्रतिरोधी बैक्टीरिया की संख्या बढ़ी है, जिसका असर सिर्फ आज ही नहीं बल्कि आने वाले कई सालों तक स्वास्थ्य प्रणालियों पर पड़ेगा।
प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया
हालाँकि राजस्व विभाग और स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा कुछ दिशानिर्देश और चेतावनियाँ जारी की जा चुकी हैं, लेकिन उनका पालन और निगरानी ज्यादातर मामलों में कमजोर दिखती है। सरकार ने ड्रग्स एक्ट में संशोधन करने और एंटीबायोटिक्स की पैकेजिंग पर विशेष सूचनाएँ लगाने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन इन प्रयासों का असर अभी सीमित है और उन पर काम तेजी से नहीं हो पा रहा।
AMR का असर सिर्फ दवा तक नहीं
AMR सिर्फ दवाइयों तक सीमित नहीं रहा — यह मिट्टी, पानी, खाद्य चैन और अस्पतालों तक पहुंच चुका है। उदाहरण के लिए, दिल्ली के जल स्रोतों में औषधीय अवशेष पाए जाने और खराब मेडिकल वेस्ट निपटान ने भी इस खतरे को बढ़ाया है। यह संकेत करता है कि AMR सिर्फ एक चिकित्सा मुद्दा नहीं; यह पर्यावरण, भोजन सुरक्षा, और समुदाय स्वास्थ्य संकट का रूप भी ले रहा है।
विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे चुके हैं कि अगर बिना पर्ची की एंटीबायोटिक बिक्री और दुरुपयोग पर तत्काल नियंत्रण नहीं हुआ, तो 2050 तक AMR से होने वाली मौतों की संख्या करोड़ों में पहुंच सकती है, जिनमें से भारत को भारी हिस्सा भुगतना पड़ सकता है। नई दिल्ली में एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित उपयोग ने AMR को सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य चुनौती बना दिया है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें अगर तुरंत संगठित कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में संक्रमणों को इलाज करना इतना मुश्किल होगा कि साधारण सर्दी-जुकाम या बुखार भी घातक बन सकते हैं। अब ज़रूरत है दीर्घकालिक नीतियों, सख़्त कार्यान्वयन और सामुदायिक भागीदारी की — ताकि आज का इलाज कल की समस्या न बन जाए।






