लोकतंत्र के मंदिर में ‘मर्यादा’ की जंग: सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की तल्खी बढ़ी
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र के सर्वोच्च सदन, लोकसभा में इन दिनों एक अभूतपूर्व राजनीतिक संग्राम छिड़ा हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की तल्खी अब पत्रों के युद्ध में बदल गई है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक कड़ा पत्र लिखकर विपक्षी सांसदों, विशेषकर महिला सांसदों के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस पत्र ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा और सदन की मर्यादा के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।
सदन में ‘अमर्यादित’ आचरण का आरोप
बीजेपी की महिला सांसदों द्वारा लिखे गए इस शिकायती पत्र में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सारी सीमाएं लांघ दीं। पत्र के अनुसार, विपक्षी सांसद न केवल सदन के ‘वेल’ (बीच का हिस्सा) में घुसे, बल्कि उनमें से कुछ ने अध्यक्ष की मेज पर चढ़कर कागज फाड़े और उन्हें हवा में उछाला। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि कुछ विपक्षी महिला सांसदों ने आक्रामक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट को घेर लिया और सत्ता पक्ष की उन बेंचों तक पहुंच गईं जहां वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री बैठते हैं। बीजेपी सांसदों ने अपने पत्र में इसे “घिनौना कृत्य” करार देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करती हैं। उन्होंने अध्यक्ष से मांग की है कि नियमों के तहत दोषी सांसदों के खिलाफ सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
विपक्ष का पलटवार: ‘डर’ या ‘सुरक्षा’?
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कांग्रेस की महिला सांसदों ने भी स्पीकर को पत्र लिखकर इसे सत्ता पक्ष की एक सोची-समझी साजिश बताया है। विपक्ष का तर्क है कि प्रधानमंत्री सदन में चर्चा का सामना करने से बच रहे थे और उनकी अनुपस्थिति को जायज ठहराने के लिए ‘सुरक्षा खतरे’ का बहाना बनाया जा रहा है।
विपक्षी सांसदों का कहना है कि वे केवल शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे और किसी भी तरह की शारीरिक हिंसा या घेराव की उनकी कोई मंशा नहीं थी। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और अन्य महिला सदस्यों ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के दबाव में स्पीकर ने विपक्ष पर “झूठे और अपमानजनक” आरोप लगाए हैं।
सदन की गरिमा पर सवाल
यह विवाद तब और गहरा गया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में कहा कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री को सलाह दी थी कि वे सदन में न आएं, क्योंकि उन्हें कुछ विपक्षी सदस्यों द्वारा अप्रिय घटना को अंजाम देने की सूचना मिली थी। स्पीकर के इस बयान ने विपक्ष को और नाराज कर दिया है, जो अब इसे “पक्षपातपूर्ण” रवैया बता रहे हैं। संसद, जिसे चर्चा और संवाद का केंद्र माना जाता है, आज आरोपों और प्रत्यारोपों के शोर में दबा हुआ नजर आ रहा है। बीजेपी का कहना है कि सदन के अंदर प्रधानमंत्री की गरिमा और सुरक्षा सर्वोपरि है, जबकि विपक्ष का मानना है कि उनकी आवाज को दबाने के लिए मर्यादा के नाम पर घेराबंदी की जा रही है। फिलहाल, यह मामला शांत होता नहीं दिख रहा है। सत्ता पक्ष कार्रवाई पर अड़ा है, तो विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बता रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा अध्यक्ष इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या संसद की कार्यवाही फिर से सुचारू रूप से चल पाएगी। लेकिन एक बात साफ है—सदन के भीतर जो कुछ भी हो रहा है, उसने देश के सामने संसदीय मर्यादाओं की नई परिभाषा गढ़ने की चुनौती पेश कर दी है।






