आसमान में अभेद्य होगी भारत की सुरक्षा: सरहद पर तैनात होंगे 30 स्वदेशी ‘सुपर रडार’, दुश्मनों की हर चाल होगी नाकाम
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा को एक नए और आधुनिक स्तर पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को दोहराते हुए, भारतीय सेना अब 30 नए स्वदेशी रडार प्रणालियों से लैस होने जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की वायु रक्षा (Air Defense) क्षमता को मजबूती देने के लिए इन अत्याधुनिक रडारों की खरीद को हरी झंडी दे दी है। यह कदम विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर भारत की निगरानी शक्ति को कई गुना बढ़ा देगा।
दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों का काल बनेंगे ये रडार
रक्षा सूत्रों के अनुसार, इन 30 नए रडारों का निर्माण पूरी तरह से भारत में किया गया है। ये रडार न केवल दुश्मन के लड़ाकू विमानों, बल्कि कम ऊंचाई पर उड़ने वाले छोटे ड्रोन्स और क्रूज मिसाइलों का भी सटीक पता लगाने में सक्षम हैं। वर्तमान युद्ध कौशल में जिस तरह से ड्रोन्स का इस्तेमाल बढ़ा है, उसे देखते हुए इन रडारों की तैनाती भारतीय सेना के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। ये ‘सुपर रडार’ हर मौसम में काम करने की क्षमता रखते हैं और दुर्गम पहाड़ी इलाकों (जैसे लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश) में भी उतनी ही सटीकता से काम करेंगे।
चीन और पाकिस्तान सीमा पर बढ़ेगी चौकसी
हाल के वर्षों में वास्तविक (LAC) और (LoC) पर बढ़ते तनाव को देखते हुए, सेना को ऐसी प्रणाली की आवश्यकता थी जो ‘रियल-टाइम’ डेटा प्रदान कर सके। ये नए रडार नेटवर्क ‘बैटलफील्ड सर्विलांस’ को मजबूत करेंगे, जिससे दुश्मन की किसी भी घुसपैठ या संदिग्ध गतिविधि की सूचना पलक झपकते ही कमांड सेंटर तक पहुँच जाएगी। सेना की वायु रक्षा रेजिमेंट इन रडारों को अपनी मौजूदा मिसाइल प्रणालियों के साथ एकीकृत (Integrate) करेगी, जिससे किसी भी खतरे को हवा में ही मार गिराना आसान हो जाएगा।
करोड़ों का निवेश और स्वदेशी तकनीक का संगम
इस परियोजना की कुल लागत हजारों करोड़ रुपये आंकी गई है, जो सीधे तौर पर भारतीय रक्षा उद्योगों को मजबूती देगी। इन रडारों का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा किया गया है। इससे न केवल विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारत दुनिया में रडार तकनीक के एक बड़े निर्यातक के रूप में भी उभर सकेगा। यह सौदा ‘मेक इन इंडिया’ के तहत निजी और सरकारी रक्षा कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण है।
अभेद्य सुरक्षा घेरे की ओर बढ़ता कदम
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध अब जमीन से ज्यादा तकनीक और आसमान पर लड़ा जाता है। भारत ने हाल ही में S-400 मिसाइल सिस्टम तैनात किया है, और अब ये 30 नए रडार उस सुरक्षा कवच को और भी गहरा बनाएंगे। यह रडार प्रणाली ‘लो रडार क्रॉस-सेक्शन’ वाले लक्ष्यों को भी ट्रैक कर सकती है, जिन्हें सामान्य रडार नहीं देख पाते।






