7 फरवरी 2026 का वैदिक पंचांग एवं राशिफल
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संवाद 24 आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री।
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 7 फरवरी 2026, शनिवार
कालगणना
कलियुग – 5127
विक्रम संवत् – 2082
शक संवत् – 1947
सम्वत्सर – सिद्धार्थी
अयन – उत्तरायण
ऋतु – शिशिर
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – फाल्गुन
पक्ष – कृष्ण
तिथि – षष्ठी रात्रि 08:15 तक, तत्पश्चात् सप्तमी
वार – शनिवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – चित्रा रात्रि 10:59 तक, तत्पश्चात् स्वाति
योग – धृति सुबह 10:48 तक, तत्पश्चात् शूल
करण – गर सुबह 08:21 तक, तत्पश्चात् वणिज रात्रि 08:15 तक, फिर विष्टि (भद्रा)
चंद्र गोचर – कन्या राशि में सुबह 10:48 तक, तत्पश्चात् तुला राशि
सूर्य, काल एवं मुहूर्त (फर्रुखाबाद स्थानीय समय)
सूर्योदय – 07:05
सूर्यास्त – 06:01
अभिजित मुहूर्त – दोपहर 12:11 से 12:54 तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:09 से 01:02 तक (8 फरवरी)
राहुकाल – सुबह 09:47 से 11:08 तक
दिशाशूल – पूर्व दिशा में (शनिवार होने के कारण)
पंचक – नहीं है
भद्रा – रात्रि 08:15 से प्रारंभ (स्वर्ग लोक की भद्रा)
व्रत-पर्व विवरण
आज फाल्गुन कृष्ण षष्ठी है। शनिवार और चित्रा नक्षत्र का संयोग तकनीकी कार्यों, निर्माण कार्य और भूमि संबंधी सौदों के लिए अत्यंत फलदायी होता है। आज के दिन शनि देव की आराधना से “धृति योग” का पूर्ण लाभ मिलता है, जिससे कार्यों में स्थिरता आती है।
विशेष जानकारी
आज चन्द्रमा सुबह 10:48 पर कन्या राशि से निकलकर शुक्र की राशि तुला में प्रवेश करेंगे। चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं और राशि स्वामी शुक्र, अतः आज का दिन विलासिता, सौंदर्य प्रसाधन और कलात्मक गतिविधियों के लिए श्रेष्ठ है। रात्रि में भद्रा प्रारंभ होगी, किंतु उसका वास स्वर्ग में होने से पृथ्वी पर मांगलिक कार्यों में भारी बाधा नहीं मानी जाती।
दिशा-विवेक
दक्षिण और पश्चिम दिशा में यात्रा आज शुभ।
पूर्व दिशा में यात्रा आवश्यक हो तो अदरक या तिल खाकर प्रस्थान करें।
सोते समय सिर दक्षिण अथवा पूर्व दिशा की ओर रखें।

आज का राशिफल 7 फरवरी 2026, शनिवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज सुबह तक आप अपने विरोधियों पर भारी पड़ेंगे। दोपहर के बाद चन्द्रमा के सप्तम भाव में आने से दाम्पत्य जीवन और व्यापारिक साझेदारी में मधुरता आएगी। अटके हुए अनुबंध आज पूरे हो सकते हैं। शनि देव की कृपा से किसी पुराने कर्ज से मुक्ति मिल सकती है। शाम का समय जीवनसाथी के साथ सुखद बीतेगा।
उपाय – हनुमान चालीसा का पाठ करें और चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
विद्यार्थियों के लिए सुबह का समय अनुकूल है। दोपहर के बाद चन्द्रमा के छठे भाव में जाने से आपको गुप्त शत्रुओं से सावधान रहना होगा। कार्यक्षेत्र में मेहनत अधिक करनी पड़ सकती है, लेकिन परिणाम आपके पक्ष में रहेंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें, विशेषकर कमर या पैरों में दर्द की समस्या हो सकती है।
उपाय – शनि मंदिर में काले तिल और तेल का दान करें।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
आज का दिन मिश्रित फलदायी है। सुबह घरेलू कार्यों में व्यस्तता रहेगी। दोपहर के बाद चन्द्रमा का पंचम गोचर आपकी रचनात्मकता को बढ़ाएगा। संतान की ओर से कोई सुखद समाचार मिल सकता है। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी। निवेश के लिए समय उत्तम है, आकस्मिक लाभ के योग बन रहे हैं।
उपाय – भगवान गणेश को दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करें।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
सुबह तक पराक्रम बना रहेगा। दोपहर के बाद चन्द्रमा के चतुर्थ भाव में आने से मन थोड़ा भावुक हो सकता है। घर के रखरखाव या सजावट पर धन खर्च होगा। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों के साथ तालमेल बिठाने की आवश्यकता है। शाम को मानसिक शांति के लिए योग का सहारा लें।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और काले तिल अर्पित करें।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आर्थिक रूप से सुबह का समय बहुत अच्छा है। दोपहर के बाद चन्द्रमा के तृतीय भाव में जाने से आपके साहस और प्रभाव में वृद्धि होगी। छोटे भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा। व्यापारिक यात्राएं सफल रहेंगी। शनि देव की कृपा से कोई बड़ा व्यावसायिक प्रोजेक्ट आपके हाथ लग सकता है।
उपय – “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज सुबह चन्द्रमा आपकी राशि में रहेंगे, जिससे मानसिक स्पष्टता बनी रहेगी। दोपहर के बाद चन्द्रमा के धन भाव में जाने से संचित धन में वृद्धि होगी। परिवार में किसी उत्सव का माहौल रह सकता है। वाणी में मधुरता रहेगी, जिससे आप बिगड़े हुए काम बना लेंगे। निवेश के लिए दिन बहुत शुभ है।
उपाय – शनि चालीसा का पाठ करें और पीपल के नीचे दीप जलाएं।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
दोपहर के बाद चन्द्रमा आपकी ही राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे आपका आत्मविश्वास और आकर्षण बढ़ेगा। चित्रा नक्षत्र का प्रभाव आपके व्यक्तित्व में निखार लाएगा। व्यापार में नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए समय उत्तम है। जीवनसाथी के साथ संबंधों में सुधार होगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा।
उपाय – माँ लक्ष्मी को सफेद पुष्प अर्पित करें।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज सुबह तक आय की स्थिति अच्छी रहेगी। दोपहर के बाद चन्द्रमा के द्वादश भाव में जाने से खर्चों की अधिकता हो सकती है। व्यर्थ की भागदौड़ से बचें। विदेश से जुड़े व्यापार में लाभ के योग हैं। शाम को किसी धार्मिक स्थल की यात्रा कर सकते हैं। शत्रुओं से सावधान रहें और अपनी गोपनीयता बनाए रखें।
उपाय – हनुमान जी को सिंदूर और चोला अर्पित करें।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
कार्यक्षेत्र में सुबह तक व्यस्तता रहेगी। दोपहर के बाद चन्द्रमा के एकादश भाव में जाने से लाभ की स्थिति मजबूत होगी। आय के नए स्रोत बनेंगे। मित्रों और बड़े भाइयों का सहयोग आपको किसी बड़ी समस्या से बाहर निकाल लाएगा। विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में अच्छी सफलता मिलेगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा।
उपाय – मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपके करियर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। दोपहर के बाद चन्द्रमा के दशम भाव में जाने से नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पिता के सहयोग से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। शनि देव आपकी राशि के स्वामी होने के कारण आज आपको मेहनत का पूर्ण फल दिलाएंगे। राजकीय कार्यों में सफलता मिलेगी।
उपाय – शनि मंदिर में लोहे की वस्तु या काली उड़द का दान करें।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
सुबह तक मानसिक तनाव रह सकता है। दोपहर के बाद भाग्य का उदय होगा। चन्द्रमा के नवम भाव में जाने से धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे। रुके हुए कार्य भाग्य के बल पर पूरे होंगे। समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। उच्च शिक्षा ले रहे विद्यार्थियों के लिए दिन उपलब्धियों वाला रहेगा।
उपाय – “हनुमान अष्टक” का पाठ करें।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
दोपहर तक साझेदारी के कार्यों में लाभ होगा। उसके बाद चन्द्रमा के अष्टम भाव में जाने से स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें। अचानक कोई खर्च सामने आ सकता है। हालांकि, शोध और गुप्त विद्याओं में रुचि रखने वालों के लिए समय ज्ञानवर्धक रहेगा।
उपाय – भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें और शनि मंत्र का जाप करें।




