खामोशी टूटी, शब्द जन्मे धन्यवाद योगी जी सीएम की पहल से खुशी को मिली नई जिंदगी
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संवाद 24 संवाददाता। कभी जो दुनिया खामोशी में सिमटी हुई थी, आज वहीं दुनिया शब्दों से भरने लगी है। यूपी के कानपुर के ग्वालटोली की रहने वाली 19 वर्षीय खुशी गुप्ता, जो जन्म से मूक-बधिर थीं, अब न सिर्फ सुन पा रही हैं बल्कि बोलने की ओर भी अपने पहले कदम बढ़ा चुकी हैं। कॉख्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन के बाद खुशी के मुंह से निकले पहले शब्द धन्यवाद योगी जी केवल दो शब्द नहीं, बल्कि उम्मीद, संघर्ष और संवेदनशील शासन की गूंज हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से शुरू हुआ यह सफर आज एक मिसाल बन चुका है। खुशी की मां गीता देवी बताती हैं कि ऑपरेशन के बाद परिवार का भरोसा और हौसला कई गुना बढ़ गया है। “अब बेटी खाना शब्दों में मांगती है, अपनी बात कहने की कोशिश करती है। पहले सब कुछ इशारों में होता था,” कहते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं। बेटी के सफल इलाज के बाद परिवार ने मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की मानो वर्षों की प्रार्थनाओं को आज शब्द मिल गए हों।
इस कहानी का एक भावुक मोड़ नवंबर 2025 में आया, जब 20 नवंबर को खुशी बिना बताए घर से निकल गई। परिजन परेशान रहे, तलाश जारी रही। 22 नवंबर को लखनऊ से सूचना मिली कि खुशी पुलिस के पास है। स्केच आर्ट और इशारों के जरिए उसने एक ही इच्छा जताई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलना। 24 नवंबर को परिवार को खबर मिली कि मुख्यमंत्री खुशी से मिलना चाहते हैं। 26 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री आवास में हुई मुलाकात ने इस कहानी की दिशा बदल दी। योगी आदित्यनाथ ने खुशी के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और इलाज, शिक्षा व परिवार के सहयोग के स्पष्ट निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर इलाज की प्रक्रिया शुरू हुई। 5 दिसंबर को एक कान का ऑपरेशन किया गया, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिला। आगे की जांच में डॉक्टरों ने कॉख्लियर इम्प्लांट की सलाह दी। फाउंडेशन और दिव्यांगजन अधिकारी के सहयोग से 26 जनवरी 2026 को ऑपरेशन किया गया और यह पूरी तरह सफल रहा।
डॉक्टरों के अनुसार खुशी अब सुन पा रही है और टूटे-फूटे शब्दों में बोल भी रही है। उसे नियमित स्पीच थेरेपी दी जा रही है। चिकित्सकों को उम्मीद है कि तीन महीने में उसकी बोली और स्पष्ट हो जाएगी, और एक साल के भीतर वह सामान्य बच्चों की तरह बातचीत कर सकेगी।
खुशी का मन आज सपनों से भरा है। वह टीवी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखकर उनकी तस्वीरें बनाती है। उसका सपना है।भविष्य में पुलिस अफसर बनना। परिवार का कहना है कि मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल ने उनकी बेटी को केवल आवाज़ नहीं दी, बल्कि नई जिंदगी दी है।
यह कहानी बताती है कि जब शासन संवेदनशील हो, तो खामोशी भी बोल उठती है और शब्द बन जाते हैं उम्मीद की सबसे मजबूत आवाज़।






