निजी स्कूलों की फीस पर कानून को लेकर सरकार बैकफुट पर, सुप्रीम कोर्ट में साफ कहा – इस सत्र में नहीं होगा लागू
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संवाद 24 नई दिल्ली। दिल्ली के लाखों अभिभावकों को निजी स्कूलों की फीस से राहत दिलाने के उद्देश्य से लाया गया नया कानून फिलहाल टल गया है। दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया है कि निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करने से जुड़ा नया कानून मौजूदा शैक्षणिक सत्र 2025-26 में लागू नहीं किया जाएगा। सरकार के अनुसार अब इस कानून को सीधे अगले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आई स्थिति
यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान सामने आई, जहां निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी और सरकारी हस्तक्षेप को लेकर दायर याचिकाओं पर विचार किया जा रहा था। दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया कि शैक्षणिक सत्र के बीच में कानून लागू करना व्यावहारिक नहीं है और इससे पूरी शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं, अदालत ने किया स्पष्ट
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सरकार के इस रुख को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि जब सरकार स्वयं ही मौजूदा सत्र में कानून लागू नहीं कर रही है, तो फिलहाल किसी अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़े अन्य कानूनी मुद्दे दिल्ली हाई कोर्ट में पहले की तरह सुने जाते रहेंगे।
क्यों लाया गया था निजी स्कूल फीस नियंत्रण कानून
दरअसल, दिल्ली सरकार ने बीते वर्ष निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए एक नया कानून तैयार किया था। इस कानून के जरिए फीस निर्धारण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और अभिभावकों को राहत देना सरकार का मुख्य उद्देश्य था।
निजी स्कूल संगठनों का विरोध बना बड़ी वजह
कानून की घोषणा के बाद कई निजी स्कूल संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। स्कूल प्रबंधन का कहना था कि शैक्षणिक सत्र के बीच में नए नियम लागू करना अव्यावहारिक है और इससे स्कूलों की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट की शुरुआती टिप्पणी ने बदली दिशा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही संकेत दिए थे कि सत्र के बीच कानून लागू करने से भ्रम और समस्याएं पैदा हो सकती हैं। अदालत ने सरकार से यह भी पूछा था कि क्या इसे अगले शैक्षणिक सत्र तक टालने पर विचार किया गया है।
अभिभावकों को झटका, स्कूलों को मिली राहत
सरकार के इस फैसले से अभिभावकों की उम्मीदों को झटका लगा है, जो इस सत्र से फीस पर नियंत्रण की उम्मीद कर रहे थे। वहीं, निजी स्कूलों को नए नियमों के अनुरूप तैयारी के लिए एक साल का अतिरिक्त समय मिल गया है।
विशेषज्ञों की राय, समय पर लागू होना जरूरी
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कानून का उद्देश्य सही है, लेकिन इसे लागू करने का समय बेहद अहम होता है। जल्दबाजी में लागू किए गए नियम व्यवस्था को सुधारने के बजाय और जटिल बना सकते हैं।
अब नजर 2026-27 सत्र पर टिकी
फिलहाल यह साफ हो गया है कि दिल्ली में निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था इस साल पुराने नियमों के तहत ही चलेगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 2026-27 सत्र से यह कानून किस रूप में लागू होता है और क्या यह वास्तव में अभिभावकों को राहत दिला पाएगा।






