‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के संदेश के साथ गमांदेवी बस्ती से उठा सांस्कृतिक चेतना का स्वर, हिंदू सम्मेलन में समाज को एकजुट करने का संदेश
Share your love

संवाद 24 संवाददाता। फतेहगढ़ नगर की गमांदेवी बस्ती में आयोजित हिंदू सम्मेलन कार्यक्रम ने सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और वैचारिक विमर्श का एक प्रभावशाली मंच प्रदान किया। यह कार्यक्रम आर. डी. लान परिसर में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, मातृशक्ति और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता देखने को मिली। आयोजन का उद्देश्य समाज में सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, संगठनात्मक यात्रा का स्मरण करना तथा वर्तमान समय में सामाजिक उत्तरदायित्वों पर संवाद स्थापित करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया। मुख्य अतिथि सह प्रांत कार्यवाह प्रदीप भदौरिया, मातृशक्ति के रूप में उपस्थित जे. एस. ग्रुप की चेयरपर्सन डॉ. सुनीता यादव, ईश्वरी ब्रह्मकुमारी प्रजापति विश्वविद्यालय से पधारी सुमन बहन तथा सामाजिक कार्यकर्ता जय गोपाल बाल्मिक द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई।
मुख्य अतिथि प्रदीप भदौरिया ने अपने संबोधन में हिंदुत्व की व्यापक अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व केवल किसी एक वर्ग या समूह तक सीमित विचारधारा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जीवन-पद्धति है जिसने सदैव सभी को आश्रय दिया है। हिंदुत्व सर्वस्पर्शी और समादर भाव से युक्त है, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण की भावना निहित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदुत्व का मूल तत्व ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को व्यवहार में उतारना है, जिससे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की दृष्टि विकसित होती है।
अपने वक्तव्य के दौरान प्रदीप भदौरिया ने संघ की सौ वर्षों की यात्रा का भी विस्तारपूर्वक उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक काल में कुछ सीमित स्वयंसेवकों से आरंभ हुआ यह संगठन आज समाज के हर क्षेत्र में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है। शिक्षा, सेवा, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में संघ से प्रेरित संगठनों का योगदान निरंतर बढ़ा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति पर गर्व करें और जीवन में अनुशासन, सेवा तथा समर्पण को मूल मूल्य बनाएं।

मातृशक्ति के प्रतिनिधि के रूप में ब्रह्मकुमारी प्रजापति विश्वविद्यालय से पधारी सुमन बहन ने सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों पर विचार रखते हुए कहा कि सनातन केवल एक धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि मानव जीवन की दिशा तय करने वाली जीवन शैली है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण विश्व को परिवार मानने की भावना ही सनातन धर्म का मूल तत्व है। उनके अनुसार आज के समय में जब समाज विभिन्न प्रकार की चुनौतियों से जूझ रहा है, तब आध्यात्मिक मूल्यों की ओर लौटना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता जय गोपाल बाल्मिक ने अपने वक्तव्य में ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि सामाजिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए पाँच प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, जिनमें स्वच्छता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वावलंबन और पारिवारिक मूल्यों का संरक्षण शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर इन विषयों पर कार्य करे, तो समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है। उन्होंने युवाओं और महिलाओं से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे इन विषयों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं।
कार्यक्रम के दौरान गमांदेवी बस्ती की बहनों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने उपस्थित जनसमूह को विशेष रूप से आकर्षित किया। पारंपरिक गीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। इन प्रस्तुतियों में न केवल मनोरंजन का तत्व था, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी निहित था। दर्शकों ने इन कार्यक्रमों की सराहना करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का संचालन वैभव सोमवंशी द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। उन्होंने मंचीय अनुशासन बनाए रखते हुए वक्ताओं और कलाकारों को क्रमबद्ध रूप से मंच पर आमंत्रित किया। उनके संचालन में कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हुआ और समय प्रबंधन भी संतुलित रहा, आयोजकों द्वारा अतिथियों का पारंपरिक रूप से सम्मान किया गया।
इस अवसर पर जिला प्रचारक मानवेन्द्र, जिला शारीरिक शिक्षण प्रमुख रजत कटियार, कृष्णकांत महाजन, ओमप्रकाश, अभिषेक, प्रांजल, बस्ती प्रमुख चन्द्रप्रकाश सहित अनेक स्वयंसेवक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए इसे भविष्य में भी निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने में सहायक होते हैं।

स्थानीय नागरिकों की सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। बड़ी संख्या में परिवारों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने सम्मेलन में भाग लिया। कई लोगों ने इसे सामाजिक संवाद का सशक्त माध्यम बताया। उनके अनुसार इस तरह के आयोजनों से समाज में जागरूकता बढ़ती है और विभिन्न वर्गों के बीच संवाद की परंपरा मजबूत होती है। कार्यक्रम स्थल पर अनुशासन और व्यवस्था भी देखने को मिली, जिससे आयोजन की सफलता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
आयोजन के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि हिंदू समाज की एकता और सांस्कृतिक चेतना ही सामाजिक मजबूती का आधार है। वक्ताओं ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि केवल भाषणों तक सीमित न रहकर समाज को व्यवहारिक स्तर पर परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। शिक्षा, सेवा और संस्कार के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है, यही सम्मेलन का मूल संदेश रहा।
कुल मिलाकर, फतेहगढ़ नगर की गमांदेवी बस्ती में आयोजित यह हिंदू सम्मेलन न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन था, बल्कि समाज के लिए वैचारिक मार्गदर्शन का मंच भी सिद्ध हुआ। हिंदुत्व, सनातन मूल्यों और पंच परिवर्तन जैसे विषयों पर हुए विचार-विमर्श ने उपस्थित लोगों को आत्मचिंतन और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में प्रेरित किया। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब समाज के विभिन्न वर्ग एक मंच पर एकत्र होकर संवाद करते हैं, तो सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा मिलती है।






