भारत-EU व्यापार समझौते से पलटेगी देश की किस्मत, इन 6 राज्यों में बरसेगा पैसा और खुलेंगे तरक्की के द्वार
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित ‘मुक्त व्यापार समझौता’ (FTA) अब अपनी अंतिम बाधाओं को पार करने के करीब है। आर्थिक विशेषज्ञों और वाणिज्य मंत्रालय के ताजा विश्लेषणों से यह साफ हो गया है कि यह समझौता केवल एक व्यापारिक संधि नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ‘संजीवनी’ साबित होने वाला है। इस मेगा-डील का सबसे बड़ा और सीधा असर भारत के 6 प्रमुख औद्योगिक राज्यों और 6 विशेष क्षेत्रों (Sectors) पर पड़ेगा, जो देश के निर्यात की तस्वीर बदल कर रख देंगे।
इन 6 राज्यों की चमकेगी किस्मत
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के वे राज्य जो विनिर्माण और कृषि निर्यात में अग्रणी हैं, इस समझौते के लागू होते ही वैश्विक बाजार में अपनी धाक जमा लेंगे:
उत्तर प्रदेश: ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत यूपी के चमड़ा, हस्तशिल्प और कालीन उद्योग को यूरोप के 27 देशों में बिना किसी भारी टैक्स के पहुंच मिलेगी। कानपुर और भदोही के निर्यातकों के लिए यह अंतरराष्ट्रीय बाजार जीतने जैसा होगा।
महाराष्ट्र: देश की आर्थिक राजधानी होने के नाते, महाराष्ट्र के इंजीनियरिंग गुड्स और जेम्स-ज्वेलरी सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है।
गुजरात: रसायनों और पेट्रोलियम उत्पादों के सबसे बड़े निर्यातक के रूप में गुजरात को यूरोपीय बाजारों में कम टैरिफ का सीधा लाभ मिलेगा।
तमिलनाडु: ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल का हब होने के कारण चेन्नई और तिरुपुर जैसे शहरों में विदेशी निवेश और नौकरियों की बाढ़ आने की संभावना है।
कर्नाटक: बेंगलुरु की आईटी कंपनियों के लिए यह समझौता यूरोपीय देशों के साथ डेटा शेयरिंग और प्रोफेशनल सर्विसेज के आदान-प्रदान को बेहद सरल बना देगा।
आंध्र प्रदेश व केरल: इन राज्यों के समुद्री खाद्य पदार्थों (Marine Products) की यूरोप में भारी मांग है। टैक्स कम होने से यहां के मछुआरों और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की आय दोगुनी हो सकती है।
इन 6 सेक्टर्स में आएगा ‘बूम’
यूरोपीय संघ के साथ होने वाली इस डील से जिन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा “बूस्ट” मिलने वाला है, वे हैं:
टेक्सटाइल (कपड़ा): वर्तमान में वियतनाम और बांग्लादेश को यूरोप में प्राथमिकता मिलती है, लेकिन इस समझौते के बाद भारतीय कपड़ों पर लगने वाला 9-12% शुल्क खत्म हो जाएगा, जिससे भारत फिर से ‘ग्लोबल लीडर’ बनेगा।
फार्मास्युटिकल: भारतीय दवाओं के लिए यूरोपीय मानकों को प्राप्त करना और वहां अपनी पैठ बनाना आसान होगा।
कृषि उत्पाद: बासमती चावल, चाय, कॉफी और फलों के निर्यात में भारी उछाल आएगा।
इंजीनियरिंग गुड्स: ऑटो पार्ट्स और मशीनरी बनाने वाली एमएसएमई (MSME) इकाइयों को नया जीवन मिलेगा।
रत्न एवं आभूषण: तराशे हुए हीरों के लिए यूरोप एक बहुत बड़ा बाजार बनकर उभरेगा।
डिजिटल सेवाएं: भारतीय सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और फ्रीलांसर्स के लिए वीजा नियमों में स्पष्टता और काम के अवसर बढ़ेंगे।
चुनौतियां और संभावनाएं
हालांकि, यूरोपीय संघ पर्यावरण और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर कड़े नियमों की मांग कर रहा है, लेकिन भारत अपनी शर्तों पर अडिग रहते हुए एक ‘विन-विन’ स्थिति (दोनों का लाभ) बनाने की कोशिश कर रहा है। यदि यह समझौता सिरे चढ़ता है, तो भारत का कुल निर्यात अगले 5 वर्षों में 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकता है।






