राहुल गांधी को ‘डरपोक’ कहना पड़ा भारी? पूर्व सांसद शकील अहमद का सनसनीखेज दावा ‘मेरी जान को खतरा’
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संवाद 24 बिहार । भारतीय राजनीति के गलियारों में एक बार फिर भूचाल आ गया है। कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे और पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने एक ऐसा दावा किया है जिसने न केवल राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है, बल्कि कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को भी चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। शकील अहमद ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी के खिलाफ टिप्पणी करने के बाद अब उनकी जान को खतरा है और उनके आवास पर हमले की साजिश रची जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
बिहार की राजनीति में दशकों तक दखल रखने वाले शकील अहमद ने हाल ही में राहुल गांधी को लेकर बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने राहुल गांधी को ‘डरपोक’ और ‘असुरक्षित’ नेता करार दिया था। अहमद का तर्क था कि राहुल गांधी उन नेताओं के साथ सहज महसूस नहीं करते जिनका अपना जनाधार है या जो उनसे वरिष्ठ हैं। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि राहुल गांधी एक तानाशाह की तरह व्यवहार करते हैं और पार्टी के भीतर लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं।
‘पुतला दहन के बहाने हमले की साजिश’
ताजा घटनाक्रम में, शकील अहमद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर सनसनी फैला दी। उन्होंने दावा किया कि उन्हें कांग्रेस के ही कुछ विश्वस्त सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि पार्टी नेतृत्व के इशारे पर उनके पटना और मधुबनी स्थित आवासों पर हमले की योजना बनाई गई है।
अहमद ने लिखा, “मुझे गुप्त रूप से सूचित किया गया है कि मंगलवार को पटना और मधुबनी में मेरे आवासों पर हमला करने के निर्देश दिए गए हैं। यह हमला पुतला जलाने के बहाने किया जाएगा। लोकतंत्र में इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने आगे दावा किया कि उनके पास वाट्सएप ग्रुप्स के ऐसे स्क्रीनशॉट भी हैं जहाँ कार्यकर्ताओं को उनके खिलाफ भड़काया जा रहा है।
कांग्रेस से मोहभंग और बगावत के सुर
शकील अहमद, जो तीन बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं, ने नवंबर 2025 में ही कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद से ही वह राहुल गांधी की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे थे। उनका आरोप है कि राहुल गांधी केवल उन युवा नेताओं को बढ़ावा दे रहे हैं जो उनकी ‘जी-हुजूरी’ करते हैं और जिनका जमीन पर कोई वजूद नहीं है। अहमद ने अमेठी की हार का जिक्र करते हुए कहा कि जो नेता अपने परिवार की पारंपरिक सीट नहीं बचा पाया, वह अपनी कमियों को स्वीकार करने के बजाय अनुभवी नेताओं को दरकिनार कर रहा है।
बीजेपी ने साधा निशाना
शकील अहमद के इन आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को कांग्रेस को घेरने का एक और मौका मिल गया है। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि शकील अहमद ने कांग्रेस का असली ‘लोकतांत्रिक चेहरा’ बेनकाब कर दिया है। बीजेपी का तर्क है कि जो पार्टी खुद को संविधान का रक्षक बताती है, वह अपने ही पूर्व नेताओं की आवाज दबाने के लिए हिंसा का सहारा ले रही है।
राजनीतिक भविष्य और सुरक्षा पर सवाल
शकील अहमद के इस दावे ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा छेड़ दी है। क्या अहमद अब किसी नई सियासी राह पर चलेंगे? या यह केवल एक अनुभवी नेता का अपनी पुरानी पार्टी के प्रति आक्रोश है? फिलहाल, इन आरोपों ने कांग्रेस की छवि पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी अलर्ट पर है। अहमद ने स्पष्ट किया है कि यदि उनके या उनके परिवार पर कोई आंच आती है, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की होगी।






