गंगा तट पर साधना में लीन कल्पवासी, रामनगरिया मेला बना आध्यात्मिक केंद्र
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संवाद 24 संवाददाता। पांचाल घाट स्थित रामनगरिया मेला इन दिनों गहन धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। गंगा तट पर बसे कल्पवासी और साधु-संत जप, तप और ध्यान में लीन हैं। ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान के साथ ही कल्पवासियों की दिनचर्या आरंभ होती है, जो पूरे दिन साधना और संयम पर आधारित रहती है।
गंगा स्नान के उपरांत कल्पवासी अपने-अपने राउटियों में बैठकर मंत्र जाप, ध्यान, योग और भजन-कीर्तन में समय व्यतीत कर रहे हैं। पूरे मेला क्षेत्र में मंत्रोच्चारण और शंखनाद की ध्वनि से भक्तिमय वातावरण बना हुआ है, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति की अनुभूति हो रही है।
विभिन्न अखाड़ों से आए साधु-संत धूनी रमाकर शिव, विष्णु और राम नाम का स्मरण कर रहे हैं। संतों द्वारा आयोजित प्रवचन और कथाओं के माध्यम से धर्म, संयम, सेवा और सदाचार का संदेश दिया जा रहा है। इन प्रवचनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित कर रहे हैं।
मेला क्षेत्र में यज्ञ, हवन और पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी नियमित रूप से संपन्न हो रहे हैं। इनमें श्रद्धालुओं की सक्रिय सहभागिता देखने को मिल रही है। वैदिक मंत्रों के साथ हो रहे इन आयोजनों से वातावरण और अधिक पवित्र एवं ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया है।
कल्पवासी कठिन तपस्या के साथ सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे हैं। सात्विक भोजन, सेवा कार्य और साधना उनकी दिनचर्या का मुख्य हिस्सा है। सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूर रहकर वे आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण की ओर अग्रसर हैं।
गंगा तट पर बना यह धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। संतों के सान्निध्य में पहुंचकर लोग मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं। रामनगरिया मेला न केवल आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह भारतीय सनातन परंपरा और संस्कृति का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहा है।






