बसंत पंचमी के पावन अवसर पर सामूहिक विवाह, 26 जोड़ों ने शुरू किया नया सफर
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संवाद 24 संवाददाता। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर मां सरस्वती महामृत्युंजय समाज सेवा समिति द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह सामाजिक समरसता, संस्कार और सहयोग की मिसाल बना। मां सरस्वती के पुजारी व मुख्य संयोजक राजकिशोर शुक्ला के नेतृत्व में संपन्न इस आयोजन में कुल 26 जोड़ों ने वैदिक रीति-रिवाजों के साथ दांपत्य जीवन में प्रवेश किया।
समारोह की शुरुआत परंपरागत रूप से पंडा बाग मंदिर से हुई, जहां से सभी दूल्हे घोड़ी पर सवार होकर बारात के रूप में निकले। दोपहर के समय बारात मठिया देवी मंदिर पहुंची, जहां पुजारी रामकिशोर शुक्ला ने सभी दूल्हों का विधिवत स्वागत और अभिनंदन किया। इसके बाद बारात गुड़गांव देवी मंदिर पहुंची, जहां समिति अध्यक्ष पवन शुक्ला एवं मां सरस्वती के भक्तों ने भव्य स्वागत किया।
मंदिर प्रांगण में बने मंच पर सभी 26 वर-वधुओं ने जयमाल कर एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया। इसके पश्चात निर्धारित मंडपों में विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से विवाह संपन्न कराए गए। पूरे आयोजन में धार्मिक अनुशासन, मर्यादा और परंपरा का विशेष ध्यान रखा गया।
आयोजन के दौरान घराती और बारातियों के लिए सामूहिक भोज की समुचित व्यवस्था की गई। सायंकाल भावुक वातावरण में सभी नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थी की शुरुआत के लिए आवश्यक सामग्री प्रदान कर विदा किया गया। इस अवसर पर समिति सदस्यों, स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों का सहयोग सराहनीय रहा।
सामूहिक विवाह में जिन जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ, उनमें प्रमुख रूप से अरुण कुमार–रिया सागर, विशाल–अंशिका, पवन–दिव्या, अमन–दिव्या, रमाकांत–भाग्यश्री, सौरभ–सलोनी, किशन–सलोनी, कृष्णा–सोनिया, अनुज–हेमा, शोभित–प्रीति, राजकुमार–मुस्कान, अभय–उपासना, अनिकेत–खुशबू, आदित्य–करिश्मा, दुर्वेश–रुचि, बलवीर–शिवानी, सचिन–मोहिनी, गौरव–रानी, अशोक कुमार–राधा, सत्यम–काजल, जदुवीर–खुशबू, रोहित–अन्नू, शिवेंद्र कुमार–काजल, अनिल–रूबी, अर्जुन–गुंजा देवी एवं राज–तनु शामिल रहे।
समिति पदाधिकारियों ने बताया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को सहयोग प्रदान करना और सामाजिक कुरीतियों को दूर करते हुए सामूहिकता और संस्कारों को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम की भव्यता और सफल आयोजन ने एक बार फिर सामूहिक विवाह की सामाजिक उपयोगिता को रेखांकित किया।






