अंडर-19 वर्ल्ड कप में हंगामा: पाकिस्तान पर स्लो गेम का दाग, क्रिकेट की आत्मा पर उठे सवाल
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संवाद 24 डेस्क। आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया है जिसने पूरे टूर्नामेंट की निष्पक्षता पर बहस छेड़ दी है। पाकिस्तान अंडर-19 टीम पर आरोप है कि उसने जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में जानबूझकर बेहद धीमी गति से रन चेज़ किया, ताकि आगे के समीकरण अपने पक्ष में मोड़े जा सकें। इस कथित रणनीति ने क्रिकेट प्रेमियों से लेकर विशेषज्ञों तक को चौंका दिया है।
मैच नहीं, गणित का खेल!
यह मुकाबला कागज़ पर आसान दिख रहा था, लेकिन मैदान पर कहानी कुछ और ही थी। लक्ष्य बहुत बड़ा नहीं था, फिर भी बल्लेबाज़ी में असामान्य सुस्ती दिखी। रन-रेट लगातार गिरता गया और दर्शक हैरान होकर स्कोरबोर्ड देखते रह गए। सवाल उठने लगे कि क्या यह खेल की मजबूरी थी या सोची-समझी चाल?
नेट रन रेट बना असली हथियार
टूर्नामेंट के ग्रुप समीकरणों में नेट रन रेट की भूमिका निर्णायक होती है। आरोप है कि पाकिस्तान टीम ने इसी गणित को ध्यान में रखते हुए आक्रामक खेलने से परहेज़ किया। हर ओवर में सिंगल-डबल, जोखिम से दूरी और स्ट्राइक रोटेशन तक सीमित बल्लेबाज़ी, इन सबने शक को और गहरा कर दिया।
स्कॉटलैंड को क्यों लगी चिंगारी?
इस पूरे घटनाक्रम में स्कॉटलैंड का नाम भी चर्चा में आ गया। माना जा रहा है कि इस धीमे चेज़ का सीधा असर स्कॉटलैंड की क्वालिफिकेशन संभावनाओं पर पड़ा। यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट कॉरिडोर तक सवाल गूंजने लगे, क्या किसी टीम के फायदे के लिए दूसरी टीमों के भविष्य से खेला जा सकता है?
क्रिकेट फैंस का फूटा गुस्सा
मैच खत्म होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई फैंस ने इसे स्पिरिट ऑफ क्रिकेट के खिलाफ बताया, तो कुछ ने इसे नियमों के भीतर रहकर खेली गई चाल कहा। हैशटैग ट्रेंड करने लगे और युवा खिलाड़ियों से बेहतर खेल भावना की उम्मीद जताई गई।
पूर्व खिलाड़ियों की दो टूक राय
पूर्व क्रिकेटरों की राय इस मामले में बंटी हुई दिखी। कुछ दिग्गजों ने कहा कि अगर नियम इसकी इजाजत देते हैं तो टीम को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। वहीं, कई पूर्व खिलाड़ियों ने इसे खेल की आत्मा के साथ धोखा बताया और कहा कि युवा स्तर पर ऐसी सोच खतरनाक संकेत है।
पाकिस्तान कैंप की चुप्पी
विवाद बढ़ने के बावजूद पाकिस्तान टीम प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया। न सफाई, न स्वीकारोक्ति, सिर्फ खामोशी। इस चुप्पी ने भी संदेह को और हवा दी है। क्रिकेट जगत अब आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहा है।
आईसीसी की नजरें, संभावित जांच
मामला तूल पकड़ने के बाद क्रिकेट के शीर्ष स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। ऐसी चर्चाएं हैं कि मैच की परिस्थितियों और खेल की गति की समीक्षा की जा सकती है। भले ही नियमों का उल्लंघन साबित न हो, लेकिन चेतावनी या दिशानिर्देश सख्त हो सकते हैं।
युवा क्रिकेट के लिए बड़ा सबक
अंडर-19 स्तर को भविष्य के सितारों की नर्सरी माना जाता है। यहां खेली गई रणनीतियां खिलाड़ियों की सोच गढ़ती हैं। ऐसे में यह विवाद एक बड़ा सवाल खड़ा करता है,क्या जीत हर कीमत पर ज़रूरी है, या खेल भावना उससे भी ऊपर?
विवाद से आगे की राह
अब निगाहें अगले मुकाबलों पर टिकी हैं। क्या टीमें इससे सबक लेंगी या गणित का खेल और तेज़ होगा? एक बात तय है—यह विवाद लंबे समय तक याद रखा जाएगा और शायद आने वाले टूर्नामेंटों में नियमों की व्याख्या भी बदले।






