पूर्वी तट पर छिपा है भारत का ऊर्जा खजाना? 24 अरब बैरल हाइड्रोकार्बन की संभावना से बढ़ी हलचल

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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत के पूर्वी समुद्री तट को लेकर एक बड़ी और उम्मीद जगाने वाली जानकारी सामने आई है। विशेषज्ञों के एक ताजा अध्ययन में यह संकेत मिला है कि देश के पूर्वी तट पर करीब 24 अरब बैरल हाइड्रोकार्बन संसाधन मौजूद हो सकते हैं। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय और भारतीय विशेषज्ञों का संयुक्त अध्ययन
यह आकलन अमेरिका की एक प्रमुख यूनिवर्सिटी और भारत के हाइड्रोकार्बन क्षेत्र से जुड़े तकनीकी संस्थानों के संयुक्त अध्ययन पर आधारित है। इस शोध में पूर्वी तट के समुद्री बेसिनों की भूगर्भीय संरचना का गहन विश्लेषण किया गया, जिससे यह संकेत मिला कि यहां तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार छिपे हो सकते हैं।

महानदी और बंगाल बेसिन बने चर्चा का केंद्र
अध्ययन के अनुसार, महानदी, बंगाल और आसपास के समुद्री बेसिन अब तक पूरी तरह खोजे नहीं गए हैं। इन क्षेत्रों में तलछटी संरचना ऐसी है, जो हाइड्रोकार्बन के निर्माण और संरक्षण के लिए अनुकूल मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यहां की भूगर्भीय बनावट वैश्विक स्तर के कई तेल-समृद्ध क्षेत्रों से मिलती-जुलती है।

अब तक कम खोजे गए क्षेत्र
भारत में अब तक पश्चिमी तट, खासकर मुंबई हाई क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान दिया गया है, जबकि पूर्वी तट अपेक्षाकृत अनदेखा रहा है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में अभी भी बड़े पैमाने पर संभावनाएं मौजूद हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से यहां नई खोजों के रास्ते खुल सकते हैं।

भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए राहत
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश की बड़ी आबादी, औद्योगिक विकास और शहरीकरण के कारण तेल और गैस की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अगर पूर्वी तट पर इतने बड़े भंडार की पुष्टि होती है, तो आयात पर निर्भरता कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल
सरकार लंबे समय से ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दे रही है। घरेलू उत्पादन बढ़ाने से न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी देश मजबूत होगा। पूर्वी तट पर संभावित खोज इसी दिशा में एक मजबूत आधार बन सकती है।

निवेश और रोजगार के नए अवसर
तेल और गैस की खोज से जुड़े प्रोजेक्ट बड़े निवेश को आकर्षित करते हैं। अगर यहां व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू होता है, तो इससे तटीय राज्यों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

पर्यावरणीय संतुलन बड़ी चुनौती
हालांकि यह संभावना उत्साहजनक है, लेकिन विशेषज्ञ पर्यावरणीय पहलुओं को लेकर सतर्क रहने की सलाह भी दे रहे हैं। समुद्री क्षेत्रों में ड्रिलिंग और सर्वे के दौरान पर्यावरण संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। सरकार और कंपनियों को आधुनिक और सुरक्षित तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा।

तकनीक और सर्वे की अहम भूमिका
भंडार की वास्तविक स्थिति जानने के लिए विस्तृत सेस्मिक सर्वे, ड्रिलिंग और वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी होंगे। ये प्रक्रियाएं समय और लागत दोनों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन इनके बिना अंतिम निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।

ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ता भारत
कुल मिलाकर, पूर्वी तट पर 24 अरब बैरल हाइड्रोकार्बन की संभावना भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है। अगर यह अनुमान धरातल पर उतरता है, तो आने वाले वर्षों में भारत ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई ताकत के रूप में उभर सकता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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