बंगाल में SIR सुनवाई के दौरान बवाल, आरोप–प्रत्यारोप और सियासी टकराव ने बढ़ाया तनाव
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संवाद 24 बंगाल। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी सुनवाइयों के दौरान कई जिलों में अचानक माहौल गरमा गया। अलग-अलग स्थानों पर लोगों ने कथित उत्पीड़न और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किए, जिससे सड़कों पर जाम, सरकारी दफ्तरों के बाहर हंगामा और पुलिस की तैनाती जैसी स्थितियां बनीं। प्रशासन का कहना है कि प्रक्रिया नियमों के तहत चल रही है, जबकि स्थानीय लोग इसे परेशान करने वाला कदम बता रहे हैं।
कई जिलों में एक साथ भड़का विरोध
दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना और कुछ अन्य इलाकों में SIR से जुड़ी सुनवाइयों के समय लोगों की भीड़ जमा हो गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नोटिस जारी करने और दस्तावेज़ों की मांग के तरीके में पारदर्शिता नहीं है। कुछ स्थानों पर रास्ते जाम किए गए, तो कहीं सरकारी दफ्तरों के बाहर नारेबाज़ी हुई, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
ग्रामीण इलाकों से उठी उत्पीड़न की शिकायतें
ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों ने दावा किया कि उनसे बार-बार काग़ज़ात मांगे जा रहे हैं और सुनवाई के दौरान सख़्त रवैया अपनाया जा रहा है। कई परिवारों ने कहा कि नाम, उम्र या पते में मामूली त्रुटियों को लेकर उन्हें अनावश्यक रूप से बुलाया गया, जिससे रोज़मर्रा की आजीविका पर असर पड़ा।
सरकारी दफ्तरों के बाहर तनावपूर्ण दृश्य
कुछ स्थानों पर प्रदर्शन उग्र हो गया और सरकारी परिसरों के बाहर अफरा-तफरी मच गई। हालात काबू में रखने के लिए पुलिस को तैनात करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान हल्की धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बनी, हालांकि बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई।
प्रशासन का पक्ष: नियमों के अनुसार हो रही प्रक्रिया
प्रशासन और निर्वाचन आयोग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है। अधिकारियों के मुताबिक, जहां भी दस्तावेज़ों में कमी पाई गई, वहां नियमों के तहत नोटिस जारी किए गए। उनका दावा है कि किसी को परेशान करने का निर्देश नहीं है और सभी शिकायतों का निस्तारण तय समयसीमा में किया जाएगा।
सियासी आरोप–प्रत्यारोप से बढ़ा तापमान
मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। सत्तारूढ़ दल और विपक्षी दलों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। विपक्ष का कहना है कि SIR की आड़ में मतदाताओं को डराया जा रहा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष का तर्क है कि विपक्ष भ्रम फैलाकर प्रक्रिया को बाधित कर रहा है। राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच ज़मीनी स्तर पर तनाव और बढ़ता दिखा।
स्थानीय लोगों की मांग: स्पष्ट दिशा-निर्देश
प्रदर्शन कर रहे लोगों की प्रमुख मांग है कि सुनवाइयों के लिए स्पष्ट और एकरूप दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। उनका कहना है कि नोटिस की भाषा सरल हो, समयसीमा यथार्थवादी हो और एक ही त्रुटि के लिए बार-बार बुलाने से बचा जाए। कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से संवाद बढ़ाने की अपील की है।
सुरक्षा व्यवस्था और शांति की अपील
स्थिति को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जहां भी शिकायतें सही पाई जाएंगी, वहां तुरंत सुधार किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र के लिए ज़रूरी है, लेकिन इसके लिए जनता का भरोसा भी उतना ही अहम है। पारदर्शी प्रक्रिया, समयबद्ध सुनवाई और स्पष्ट संवाद से ही मौजूदा तनाव कम किया जा सकता है। आने वाले दिनों में प्रशासन के कदम और राजनीतिक दलों का रुख यह तय करेगा कि हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं।






