आगरा के विशेष जूते मधुमेह और उच्च रक्तचाप मरीजों के लिए नई उम्मीद
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संवाद 24 संवाददाता। आगरा जो दुनिया भर में अपने चमड़ा उद्योग और जूतों के लिए प्रसिद्ध है, अब स्वास्थ्य क्षेत्र में भी नवाचार की मिसाल बन रहा है। यहां तैयार किए जा रहे विशेष तकनीक वाले जूते मधुमेह (डायबिटीज) और उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) से पीड़ित मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। ये जूते न सिर्फ पैरों को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि रक्तचाप को नियंत्रित करने और रक्तसंचार बेहतर बनाने में भी सहायक साबित हो रहे हैं।
आगरा में लगभग 15 प्रतिशत आबादी मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रही है। मधुमेह मरीजों में सबसे बड़ी समस्या पैरों में सुन्नता (न्यूरोपैथी) की होती है, जिसके कारण चोट या घाव का समय पर पता नहीं चल पाता। यही कारण है कि मामूली जख्म भी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेता है और कई मामलों में गैंग्रीन तक की स्थिति बन जाती है, जिससे अंगुली, पंजा या पैर काटने की नौबत आ जाती है।
फोर लेयर तकनीक से बना सुरक्षा कवच
द आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष विजय सामा के अनुसार, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए विशेष फोर लेयर तकनीक वाले जूते तैयार किए जा रहे हैं। इनमें खास तरह का अपर लगाया जाता है, जिसमें एयर बैग और सीढ़ीनुमा डिजाइन होता है। चलने के दौरान यह डिजाइन पैरों की हल्की मसाज करता है, जिससे रक्तसंचार बेहतर होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रक्तचाप संतुलन में रहता है और इंसुलिन स्राव में भी सहयोग मिलता है।
इन जूतों की मांग सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है। आगरा का यह नवाचार अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान बना रहा है।
जर्मन तकनीक से प्रेरित डिज़ाइन
जूता उद्यमी आशीष जैन बताते हैं कि गठिया के बाद अब डायबिटिक-हाइपरटेंशन रेंज के जूतों की सबसे अधिक मांग है। जर्मनी की पांच जोन तकनीक पर आधारित इन जूतों में एड़ी, तलवा, पंजा, अंगुली और अंगूठे के नीचे एयर बैग लगाए जाते हैं। इससे चलने पर मांसपेशियों का व्यायाम होता है, तंत्रिका तंत्र सक्रिय रहता है और रक्तसंचार तेज होता है।
ये जूते बेहद हल्के होते हैं, पंजा चौड़ा होता है, जिससे अंगुलियों पर दबाव नहीं पड़ता और घाव बनने की आशंका कम हो जाती है। बाहरी हल्की चोटों से भी ये प्रभावी सुरक्षा प्रदान करते हैं।
डॉक्टरों की भी सलाह
आगरा डायबिटिक फोरम के सचिव डॉ. सुनील बंसल बताते हैं कि मधुमेह मरीजों में घाव भरने की प्रक्रिया सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक समय लेती है। यदि शुगर अनियंत्रित हो तो गैंग्रीन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में विशेष डिजाइन वाले जूते मरीजों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। यही वजह है कि अब डॉक्टर भी मरीजों को इस तरह के जूते पहनने की सलाह दे रहे हैं।
स्वास्थ्य और उद्योग का अनूठा संगम
आगरा में तैयार हो रहे ये जूते इस बात का उदाहरण हैं कि जब परंपरागत उद्योग आधुनिक तकनीक और स्वास्थ्य जरूरतों से जुड़ता है, तो समाज को सीधा लाभ मिलता है। ये जूते न केवल मरीजों के पैरों की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि उन्हें बेहतर जीवन की ओर भी कदम बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।
आने वाले समय में यदि इस तरह के नवाचारों को और बढ़ावा मिले, तो आगरा सिर्फ जूतों की नगरी ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य-अनुकूल तकनीक का केंद्र भी बन सकता है।






