कड़ाके की ठंड का कहर हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के बढ़े मामले, आठ की मौत
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संवाद 24 संवाददाता। शहर में जारी कड़ाके की ठंड लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। तापमान में लगातार गिरावट के बीच दिल और दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामलों में अचानक इजाफा देखा जा रहा है। कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट और हैलट अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार को हालात चिंताजनक रहे।
कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा के अनुसार, ठंड के चलते हार्ट अटैक के लक्षण वाले 55 मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। रविवार को ओपीडी में कुल 449 मरीजों की जांच की गई, जबकि शाम पांच बजे तक इमरजेंसी में 55 लोग सीने में दर्द, घबराहट और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतों के साथ पहुंचे। एक दिन पहले शनिवार को भी 214 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि आठ मरीजों को अस्पताल मृत अवस्था में लाया गया।
ब्रेन स्ट्रोक के बढ़ते मामले
उधर, हैलट अस्पताल की इमरजेंसी में भी ठंड का असर साफ नजर आया। यहां ब्रेन स्ट्रोक के 10 मरीजों को गंभीर हालत में भर्ती किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, ठंड में ब्लड प्रेशर बढ़ने और रक्त वाहिकाओं के सिकुड़ने से स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, खासकर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में।
अन्य गंभीर मरीज भी भर्ती
हार्ट और ब्रेन से जुड़े मामलों के अलावा गुर्दा, लिवर, निमोनिया और सांस तंत्र से संबंधित बीमारियों के मरीज भी गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे। ठंडी हवाओं और प्रदूषण के चलते सांस की दिक्कत वाले मरीजों की संख्या में भी तेजी आई है।
डॉक्टरों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के मौसम में विशेष सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। सुबह-शाम ठंड से बचाव, नियमित दवाइयों का सेवन, ब्लड प्रेशर और शुगर की निगरानी, और सीने में दर्द, चक्कर या बोलने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचना जान बचा सकता है।
निष्कर्ष
कड़ाके की ठंड सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती है। आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। ऐसे में सतर्कता और समय पर इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है।






