हिमालय की ऊँचाइयों से दिल्ली तक, लद्दाख की सैन्य शक्ति का भव्य प्रदर्शन
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संवाद 24 नई दिल्ली। नई दिल्ली में 26 जनवरी को आयोजित 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में इस बार एक ऐसा दृश्य देखने को मिलेगा जो इतिहास में दर्ज हो जाएगा — जहाँ शौर्य, परंपरा और तकनीक एक साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगी। कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और हजारों देशवासियों की निगाहें टिकी रहेंगी, जब भारतीय सेना का हर तुकड़ा अपने अनुशासन और सामरिक सामर्थ्य का शानदार प्रदर्शन करेगा।
पहली बार: लद्दाख के बैक्ट्रियन ऊँट और चारों ओर बाज़ों का अद्भुत मार्च
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में लद्दाख में सेवा देने वाले बैक्ट्रियन ऊँट (दो कूबड़ वाले ऊँट) पहली बार दिल्ली की परेड में शामिल होंगे — यह वह पल है जिसका देशभर के लोग बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। ये ऊँट, जो बेहद कठिन तापमान और ऊँचाई वाले इलाकों में सेना के रसद तथा गश्ती कार्यों में मदद करते हैं, पहली बार कर्तव्य पथ पर मार्च करते दिखाई देंगे। उनके साथ लद्दाख के ज़ानस्कर पोनीज़, जो ऊँची चोटियों में भारी बोझ उठाने की अद्भुत क्षमता रखते हैं, और प्रशिक्षित सैनिक कुत्तों की टुकड़ी भी परेड का हिस्सा बनेगी। इन चार-पैरों वाले ‘शूरवीरों’ के साथ प्रशिक्षित बाज़ों का प्रदर्शन भी परेड में शामिल किया गया है, जो ड्रोन और निगरानी कार्यों में अपनी अनोखी कुशलता के लिए जाने जाते हैं।
सेना की ताकत और तकनीक का मिलाजुला संदेश
बैक्ट्रियन ऊँटों के अलावा परेड में आधुनिक सैन्य उपकरण, टैंक, मिसाइल प्रणालियाँ और वायु सेना के फ्लाईपास्ट भी शामिल होंगे, जो देश की रक्षा क्षमताओं को प्रदर्शित करेंगे। सेना की ये प्रस्तुति यह संदेश देती है कि भारतीय सशस्त्र बल न केवल तकनीकी रूप से आधुनिक हैं, बल्कि देश के कठिन भौगोलिक इलाकों में भी अपनी ताकत दिखाने में सक्षम हैं।
परंपरा, सम्मान और राष्ट्रीय भावना
हर साल की तरह इस बार भी देश के विभिन्न कोनों से आए समाज-संस्कृति झांकियाँ कार्यक्रम में छाएँगी। भारतीय राज्यों और मंत्रालयों द्वारा तैयार की गई झांकियाँ भारतीय विविधता, कला-संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे विषयों को आकर्षक रूप से प्रस्तुत करेंगी। इस अवसर पर राष्ट्रपति भवन से कर्तव्य पथ तक का मार्ग भारतीय संविधान को आत्मसात करने और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का प्रतीक भी बनता है। राजपथ पर परेड के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, और राष्ट्रपति द्वारा सलामी लेने के बाद सभी बलों का मार्च-पास्ट शुरू होता है।
दर्शकों का उत्साह और सुरक्षा का प्रबंधन
पर्याप्त भीड़, ख़ासकर परिवार, छात्र और देशभक्ति से प्रेरित नागरिक इस परेड को देखने के लिए सुबह-सुबह कर्तव्य पथ पर इकट्ठा होते हैं। दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियाँ यातायात, सुरक्षा और दर्शकों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध करती हैं, ताकि यह समारोह शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित रूप से सम्पन्न हो सके।






