भाजपा में पीढ़ीगत बदलाव की मुहर: नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की औपचारिकता पूरी, नई टीम पर नजर
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की दिशा साफ हो गई है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का अगले सप्ताह राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। 45 वर्ष की उम्र में शीर्ष संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपकर भाजपा ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव की ओर बढ़ रही है।
हालांकि, अध्यक्ष पद के साथ सबसे बड़ा सवाल अब नई राष्ट्रीय टीम को लेकर है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नितिन नबीन की अगुवाई में बनने वाली टीम में युवा चेहरों की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के अनुभव को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठन को जहां युवा ऊर्जा की जरूरत है, वहीं जमीनी और प्रशासनिक अनुभव के बिना संतुलन संभव नहीं है।
भाजपा का संसदीय बोर्ड पार्टी का सबसे प्रभावशाली निकाय माना जाता है, जहां टिकट वितरण से लेकर मुख्यमंत्री और अन्य बड़े राजनीतिक फैसले होते हैं। मौजूदा संसदीय बोर्ड में शामिल अधिकांश नेता 60 वर्ष से अधिक उम्र के हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि नितिन नबीन के अध्यक्ष बनने के बाद इस बोर्ड की संरचना में कोई बदलाव होता है या नहीं।
पार्टी संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए उम्मीदवार का कम से कम 15 वर्षों तक प्राथमिक सदस्य रहना और चार कार्यकाल तक सक्रिय सदस्य होना अनिवार्य है। संगठनात्मक चुनाव बहुस्तरीय प्रक्रिया के तहत होते हैं—पहले प्राथमिक इकाइयों से लेकर मंडल, जिला और प्रदेश स्तर तक। इसके बाद राष्ट्रीय परिषद का गठन होता है, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करती है।
राष्ट्रीय परिषद में लोकसभा सीटों के अनुपात में सदस्य होते हैं। महिलाओं और आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक समायोजन का भी प्रावधान है। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन कम से कम पांच राज्यों की राष्ट्रीय परिषद इकाइयों के प्रस्ताव से किया जाता है, जहां संगठनात्मक चुनाव पूरे हो चुके हों।
हालांकि, भाजपा के इतिहास में अब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए कभी मतदान की नौबत नहीं आई है। हर बार निर्विरोध निर्वाचन हुआ है, लेकिन औपचारिक चुनावी प्रक्रिया पूरी की जाती है।
नितिन नबीन के अध्यक्ष बनने के साथ ही भाजपा के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया औपचारिक रूप लेती दिख रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई राष्ट्रीय टीम में युवा नेतृत्व को कितनी जगह मिलती है और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका किस रूप में तय होती






