“समृद्धि की पहली दस्तक: नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ से क्या बदल सकता है बिहार का विकास परिदृश्य?”
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संवाद 24 बिहार। उत्तर बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार से ‘समृद्धि यात्रा’ की शुरुआत कर दी है — जो इस बार की सरकार की सबसे बड़े स्तर की विकास समीक्षा एवं सार्वजनिक संवाद मुहिम के रूप में देखी जा रही है। यह यात्रा 16 जनवरी 2026 से शुरू होकर लगभग 8 दिनों तक 9 जिलों में विभिन्न विकास परियोजनाओं, योजनाओं और जनता से संवाद कार्यक्रमों को समेटे है। इस अभियान की मुख्य रणनीति यह है कि मुख्यमंत्री स्वयं जिला-स्तर पर जाकर सरकारी योजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन करें, जनता के साथ खुलकर बातचीत करें और योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली दिक्कतों का तुरंत समाधान ढूंढें। इसके तहत कई परियोजनाओं का शिलान्यास, लोकार्पण और निरीक्षण कार्यक्रम भी शामिल हैं।
यात्रा का उद्देश्य और विस्तार
यह ‘समृद्धि यात्रा’ मूलतः राज्य सरकार की विकास योजनाओं की वास्तविक स्थिति को समझने, उनके प्रभाव का जायज़ा लेने और नए विकास पहलों को गति देने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इस तरह की यात्राएं नीतीश सरकार की प्रशासनिक शैली का एक अहम हिस्सा रही हैं, जिनका लक्ष्य जनता के बीच पहुंच बनाना और योजनाओं की प्रभावशीलता का बेहतरीन आकलन करना है। पहले चरण में यह यात्रा पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, गोपालगंज, सिवान, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जैसे जिलों में जाएगी। हर जिले में मुख्यमंत्री जनसंवाद कार्यक्रम, समीक्षा बैठकें, परियोजनाओं का निरीक्षण और नई योजनाओं की घोषणा करेंगे।
विकास योजनाओं की सौगात
समृद्धि यात्रा के मौके पर मुख्यमंत्री पश्चिम चंपारण को 182 करोड़ रुपये की कुल 161 विकास योजनाओं की सौगात देने वाले हैं। इनमें से कई परियोजनाओं का शिलान्यास 153 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा, जबकि 36 योजनाओं का उद्घाटन भी इसी दौरान होगा। इन परियोजनाओं का दायरा सड़क-पुल, पेयजल, ग्रामीण विकास, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसे मूलभूत क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिससे आम जनता के जीवन को सीधे लाभ मिल सके। इससे कृषि, ग्रामीण उद्योग और रोजगार बनाने में भी उम्मीद के संकेत देखे जा रहे हैं।
जनता से संवाद और समीक्षा
समृद्धि यात्रा का एक बड़ा आकर्षण जनता से सीधा संवाद है। मुख्यमंत्री विभिन्न सार्वजनिक बैठकों में उपस्थित होंगे, जहां आम नागरिक अपनी शिकायतें और सुझाव सीधे उनके समक्ष रख सकेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में इन चर्चाओं से योजनाओं के कार्यान्वयन में आ रही रुकावटों को भी दूर किया जायेगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मीटिंग भी कर रहे हैं, ताकि योजनाओं की जमीनी स्थिति का सही जायज़ा लिया जा सके और जरूरी निर्देश दिए जा सकें। तैयारी को ध्यान में रखते हुए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी जिलाधिकारियों तथा विभागाध्यक्षों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक मायने
राजनीतिक विश्लेषक इसे सिर्फ विकास कार्यक्रम नहीं मान रहे; उन्होंने संकेत दिया है कि इससे जनता के विश्वास को मजबूत करने, चुनाव से पहले प्रशासनिक प्रतिक्रिया तत्परता में सुधार करने और सरकारी योजनाओं के लाभ को जन-स्तर पर व्यापक रूप से पहुँचाने का अवसर भी मिलता है। इतिहास में यह संकेत मिलता है कि नीतीश कुमार की यात्राएँ केवल प्रचार-प्रसार का जरिया नहीं रहीं, बल्कि सुशासन, योजनाओं के कार्यान्वयन का ठोस आंकलन तथा जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने का एक लगातार प्रयास रही हैं।






