शेयर बाजार की छुट्टी पर घमासान: ‘मुझे इंसेंटिव दिखाओ’ पोस्ट से भड़की बहस, नितिन कामत बनाम बाजार तंत्र
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संवाद 24 बिज़नेस डेस्क। महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों के चलते शेयर बाजार में ट्रेडिंग हॉलिडे को लेकर एक अप्रत्याशित बहस छिड़ गई है। इस बहस की शुरुआत की नितिन कामत, जिन्होंने बाजार बंद रहने पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर एक तीखी टिप्पणी कर दी। उनका कहना है कि वैश्विक रूप से जुड़े बाजारों के दौर में स्थानीय चुनाव के कारण ट्रेडिंग रोकना खराब योजना का उदाहरण है।
दरअसल, पहले 15 जनवरी को केवल सेटलमेंट हॉलिडे माना जा रहा था, लेकिन बाद में एक्सचेंजों की ओर से संशोधित सर्कुलर जारी कर पूरे दिन की ट्रेडिंग को बंद कर दिया गया। इसी फैसले ने उद्योग जगत में असहजता पैदा कर दी।
‘मुझे इंसेंटिव दिखाओ’ बयान बना विवाद की जड़
नितिन कामत ने एक्स पर पोस्ट करते हुए दिवंगत निवेशक चार्ली मंगर का हवाला दिया, “मुझे इंसेंटिव दिखाओ और मैं तुम्हें नतीजा दिखा दूंगा।”
कामत का तर्क था कि बाजार बंद रखने के फैसले को चुनौती देने के लिए किसी भी बड़े स्टेकहोल्डर के पास ठोस प्रोत्साहन नहीं है। उन्होंने लिखा कि ऐसे निर्णय यह दर्शाते हैं कि भारतीय पूंजी बाजारों को वैश्विक निवेशकों के भरोसे पर खरा उतरने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है।
बाजार की छुट्टी पर उद्योग जगत बंटा
कामत की टिप्पणी के तुरंत बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया। समीर अरोड़ा, जो Helios Capital के संस्थापक हैं, ने इस तर्क की निरंतरता पर सवाल उठाए। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि अगर वैश्विक कनेक्टिविटी का तर्क सही है, तो 1 फरवरी जैसे रविवार को भी बाजार खुले रहने चाहिए, जब सरकार ने बजट के दिन ट्रेडिंग की अनुमति दी है।
अरोड़ा ने यह भी जोड़ा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए रविवार को बाजार खुला रखना व्यावहारिक रूप से कितना उचित है, इस पर भी बहस होनी चाहिए।
नीति बनाम वैश्विक सोच
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहस सिर्फ एक छुट्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय बाजार संरचना, नियामकीय प्राथमिकताओं और वैश्विक एकीकरण के बीच संतुलन पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। एक तरफ घरेलू प्रशासनिक फैसले हैं, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की अपेक्षाएं।
फिलहाल बाजार बंद हैं, लेकिन नितिन कामत की एक पोस्ट ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय शेयर बाजार की कार्यप्रणाली और उसके भविष्य को लेकर उद्योग जगत के भीतर मंथन तेज हो चुका है।






