सेना दिवस पर प्रधानमंत्री का नमन: दुर्गम पहाड़ों से बर्फीली चोटियों तक देश की ढाल बनी भारतीय सेना
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संवाद 24 नई दिल्ली। सेना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सुरक्षा में तैनात जवानों को नमन करते हुए उनके साहस, शौर्य और निस्वार्थ सेवा की खुले शब्दों में सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय सेना जिस दृढ़ता और समर्पण के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करती है, वह हर भारतवासी के लिए गर्व का विषय है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि दुर्गम इलाकों से लेकर बर्फ से ढकी ऊँची चोटियों तक भारतीय सेना का पराक्रम राष्ट्र को सुरक्षित रखने की मजबूत ढाल है। उन्होंने सीमा पर डटे जवानों का हृदय से अभिनंदन करते हुए कहा कि देश उनकी बहादुरी और अटूट संकल्प को सलाम करता है।
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय सेना के जवान निस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं, जो विपरीत हालात में भी बिना डगमगाए राष्ट्र रक्षा के दायित्व को निभाते हैं। उनका त्याग और कर्तव्यनिष्ठा पूरे देश में विश्वास और कृतज्ञता की भावना को और मजबूत करती है। प्रधानमंत्री ने उन वीर सपूतों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
सेना दिवस का महत्व
हर वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाने वाला सेना दिवस भारतीय सैन्य इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इसी दिन वर्ष 1949 में के. एम. करियप्पा ने भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ के रूप में पदभार ग्रहण किया था। इस अवसर को भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा, अनुशासन और बलिदान के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
सेना दिवस न केवल सेना के अदम्य साहस को सम्मान देने का दिन है, बल्कि यह हर नागरिक को यह याद दिलाता है कि देश की आज़ादी, संप्रभुता और शांति की रक्षा के पीछे भारतीय सेना का अथक परिश्रम और बलिदान निहित है।






