वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक उड़ान, विश्व बैंक ने जताया भरोसा
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संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी आर्थिक मजबूती का लोहा मनवाया है। विश्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जो कई विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से कहीं अधिक है।विश्व बैंक की ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग, सरकारी निवेश और सेवा क्षेत्र की स्थिरता के कारण लगातार आगे बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत का ग्रोथ इंजन सुचारू रूप से काम कर रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में भी सकारात्मक रुझान बना रह सकता है।
अमेरिकी टैरिफ का सीमित प्रभाव
रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए कुछ आयात शुल्क और वैश्विक व्यापार तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ा है। हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था पर इन टैरिफ का प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। इसका कारण यह है कि भारत की आर्थिक वृद्धि का बड़ा आधार घरेलू उपभोग और आंतरिक बाजार है, जो बाहरी झटकों को काफी हद तक संतुलित कर लेता है।
घरेलू मांग और निवेश बना सहारा
विश्व बैंक के अनुसार, भारत में उपभोक्ता खर्च, बुनियादी ढांचे में सरकारी निवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी ने आर्थिक गतिविधियों को मजबूती दी है। सड़क, रेलवे, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्रों में हो रहे बड़े निवेश से रोजगार के अवसर बढ़े हैं, जिससे मांग और उत्पादन दोनों को बल मिला है।
सेवा और विनिर्माण क्षेत्र की अहम भूमिका
भारत का सेवा क्षेत्र, खासकर आईटी, वित्तीय सेवाएं और स्टार्टअप इकोसिस्टम, देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बना हुआ है। इसके साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों से विनिर्माण क्षेत्र में भी गति आई है। विश्व बैंक का मानना है कि यदि नीतिगत स्थिरता बनी रही, तो ये दोनों क्षेत्र भारत की विकास दर को लंबे समय तक सहारा देंगे।
वैश्विक तुलना में भारत आगे
जहां कई विकसित देशों में आर्थिक वृद्धि दर सुस्त बनी हुई है, वहीं भारत लगातार उच्च विकास दर दर्ज कर रहा है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत न केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।
भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत
रिपोर्ट के अंत में यह संकेत दिया गया है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अत्यधिक खराब नहीं होतीं, तो भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में भी मजबूती से आगे बढ़ती रहेगी। संरचनात्मक सुधार, युवा आबादी और बढ़ता डिजिटल ढांचा भारत को दीर्घकालिक आर्थिक सफलता की ओर ले जा सकता है।






