तय हो सकती है भारत-अमेरिका की बड़ी ट्रेड डील? जयशंकर-रुबियो ने फोन पर की बात, फरवरी में हो सकती है महत्वपूर्ण मुलाकात
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की सक्रिय कोशिशों के बीच आज विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ एक विस्तृत फोन पर रणनीतिक चर्चा की। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और रणनीतिक साझेदारी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया और कहा कि वे आपसी सहयोग को और मजबूत करने के लिए आगे बातचीत जारी रखेंगे। इस बातचीत में भारत-अमेरिका के व्यापार सौदे (बिलैटरल ट्रेड डील) पर भी व्यापक चर्चा हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच व्यापार डील को बढ़ावा देने की साझा इच्छा जताई। बताया जा रहा है कि फरवरी में दोनों नेताओं की संभावित आमने-सामने बैठक भविष्य के समझौतों और सहयोग की दिशा को स्पष्ट कर सकती है। व्यापार, रक्षा और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों में सहयोग की चर्चा के अलावा इस फोन कॉल ने यह संकेत भी दिया कि भारत और अमेरिका आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करना चाहते हैं। दोनों देशों ने इंडो-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र और खुले रखने की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया, जो क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए अहम है।
क्या है व्यापार डील की असल स्थिति?
हालांकि अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ, यह वार्ता इस बात का संकेत देती है कि दोनों सरकारें बिलैटरल ट्रेड डील को पूरा करने के लिए गंभीर रूप से काम कर रही हैं। पिछले कुछ समय में अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ और व्यापार शुल्कों को लेकर कुछ मतभेद भी उभरे हैं, लेकिन इन उच्च-स्तरीय वार्ताओं से यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों पक्ष संवाद और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं।
रणनीतिक सहयोग के अन्य क्षेत्र:
डिफेंस और सुरक्षा साझेदारी: दोनों मंत्री ने रक्षा सहयोग को भी एक प्रमुख कारक के रूप में रखा। एनर्जी और खनिज संसाधन: अमेरिका ने भारत के न्यायिक ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों की सराहना की और बताया कि इससे परमाणु सहयोग के अवसर बढ़ सकते हैं। इंडो-प्रशांत: मुक्त और खुले इंडो-प्रशांत क्षेत्र दोनों पक्षों की प्राथमिकता बनी। दोनों नेताओं की यह बातचीत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक साझेदारियों में से एक के रूप में भारत-अमेरिका रिश्तों को दर्शाती है। भविष्य में यदि यह व्यापार डील वास्तव में फरवरी में तय होती है, तो यह न सिर्फ भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ाएगी, बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।






