अखिलेश दुबे से जुड़े छह मामलों की एसआईटी जांच ठप, चार माह में नतीजा शून्य टीम दोगुनी हुई, लेकिन जांच की रफ्तार नहीं बढ़ी

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संवाद 24 संवाददाता। कानपुर जेल में बंद अधिवक्ता अखिलेश दुबे से जुड़े छह गंभीर मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतें आए लगभग चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन न तो जांच पूरी हो सकी है और न ही कोई ठोस निष्कर्ष सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि एसआईटी का आकार चार से बढ़ाकर आठ सदस्यीय कर दिया गया, इसके बावजूद विवेचना की गति कछुआ चाल से भी धीमी बनी हुई है।

शुरुआत में दिखी तेजी, फिर पड़ गया ब्रेक
छह अगस्त 2025 को भाजपा नेता रवि सतीजा की तहरीर पर बर्रा थाने में अखिलेश दुबे, लवी मिश्रा और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अखिलेश और लवी मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इसी क्रम में किदवईनगर और कोतवाली में दो-दो मुकदमे दर्ज हुए, वहीं जूही क्षेत्र के 15 साल पुराने मामले की भी दोबारा जांच शुरू की गई। उस समय ऐसा लग रहा था कि एसआईटी तेजी से रिपोर्ट तैयार करेगी, लेकिन कुछ ही हफ्तों में जांच की रफ्तार सुस्त पड़ती चली गई।

ऑपरेशन महाकाल के बाद बढ़ीं शिकायतें
सितंबर में तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने ‘ऑपरेशन महाकाल’ शुरू किया, जिसमें जमीन कब्जा और अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी कई शिकायतें सामने आईं। सीपी कार्यालय से ये शिकायतें एसआईटी को सौंपी गईं। एक साथ कई मामलों की जांच प्रभावित न हो, इसके लिए टीम को आठ सदस्यीय कर दिया गया। इसके बावजूद 10 अगस्त के बाद अखिलेश दुबे और उसके साथियों के खिलाफ कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं हुई।

कमिश्नर बदले, जांच पर सवाल बरकरार
अक्तूबर में अखिल कुमार का तबादला हुआ और रघुबीर लाल ने नए पुलिस कमिश्नर के रूप में कार्यभार संभाला। बदलाव के बाद एसआईटी जांच को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि नए कमिश्नर ने निष्पक्ष जांच के आदेश दिए। 26 नवंबर को एसआईटी ने 43 शिकायतों में से 37 में सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए अखिलेश दुबे और उसके करीबियों को क्लीनचिट दे दी। वक्फ से जुड़े चार मामलों की जांच जिला प्रशासन को सौंप दी गई, जबकि करीब 10 मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। इसके बावजूद छह अहम मामले आज भी लंबित हैं।

जानिए वे छह मामले, जिन पर अटकी है जांच

  1. युवती के बदले बयान और कथित वसूली का मामला
    गोविंदनगर निवासी सागर मल्होत्रा पर युवती ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था, लेकिन कोर्ट में बयान से मुकर गई। इसके बावजूद तत्कालीन इंस्पेक्टर ने चार्जशीट दाखिल कर दी। आरोप है कि केस खत्म कराने के नाम पर आठ लाख रुपये लिए गए, जिसमें अखिलेश दुबे के करीबी लवी मिश्रा को हिस्सा मिला। युवती और लवी मिश्रा की बातचीत की रिकॉर्डिंग एसआईटी के पास है, जिसमें अखिलेश की भूमिका की जांच हो रही है।
  2. अधिवक्ता को व्हाट्सएप कॉल से धमकी
    अधिवक्ता मनोज सिंह ने आरोप लगाया कि अखिलेश दुबे के कहने पर टोनू यादव ने उन्हें प्लॉट विवाद में धमकी दी। एसआईटी ने कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच शुरू की है, लेकिन अब तक निष्कर्ष नहीं निकला।
  3. कारोबारी से बदसलूकी और पगड़ी उतारने का आरोप
    कारोबारी जसबीर सिंह भाटिया का आरोप है कि दुकान सौदे के विवाद में अखिलेश दुबे ने उन्हें धमकाया और पगड़ी उतारकर बेइज्जत किया। इस मामले में भी जांच अधर में है।
  4. बिकरू कांड से जुड़ी कथित साजिश
    अधिवक्ता सौरभ भदौरिया का आरोप है कि बिकरू कांड की पैरवी रोकने के लिए उनके खिलाफ झूठा मुकदमा रचने की साजिश अखिलेश दुबे के घर पर रची गई। नौकरानी और आरोपी पक्ष के बीच बातचीत की रिकॉर्डिंग मिली है, लेकिन आगे की कार्रवाई लंबित है।
  5. दुकान पर कब्जे की शिकायत
    गोविंदनगर के संजय अग्रवाल ने अखिलेश दुबे पर दुकान कब्जाने का आरोप लगाया। कॉल डिटेल सामने आई हैं, पर जांच पूरी नहीं हो सकी।
  6. केडीए जमीन घोटाले से जुड़ा मामला
    साकेतनगर निवासी श्रवण कुमार बाजपेई ने केडीए वीसी के पूर्व पीए कश्यपकांत दुबे पर जमीनों में खेल का आरोप लगाया। साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, लेकिन जांच की गति धीमी है।

पुलिस कमिश्नर का दावा
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल का कहना है कि एसआईटी को डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और तकनीकी सबूत जुटाने के निर्देश दिए गए हैं और जल्द ही जांच पूरी कर ली जाएगी।

Pavan Singh
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