कैलेंडर नहीं, शास्त्र बोलते हैं: 2026 में मकर संक्रांति का पुण्यकाल कब है? शास्त्रों ने भ्रम तोड़ा, पुण्यकाल पर बड़ा निर्णय

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संवाद 24 यज्ञाचार्य अमरदीप शुक्ल।

मकर संक्रांति 14 जनवरी,
पुण्यकाल 15 जनवरी – शास्त्रानुसार निर्णय

मकर संक्रांति को लेकर हर वर्ष देशभर में स्नान, दान और पुण्यकाल को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। अधिकांश पंचांग और कैलेंडर केवल तिथि का उल्लेख करते हैं, परंतु धर्मशास्त्रों में पुण्यकाल का निर्णय केवल तिथि से नहीं, बल्कि संक्रांति के समय और उसकी स्थिति से किया जाता है। वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को सायं 03:07 बजे घटित हो रही है, जो शास्त्रीय दृष्टि से मध्याह्नोत्तर संक्रांति मानी जाती है। ऐसी स्थिति में प्रश्न उठता है, क्या स्नान-दान 14 जनवरी को होगा या 15 जनवरी को?धर्मशास्त्रों में संक्रांति को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया गया है –

  1. प्रातः संक्रांति — सूर्योदय से पूर्व
  2. मध्याह्न संक्रांति — सूर्योदय से मध्याह्न तक
  3. मध्याह्नोत्तर संक्रांति — मध्याह्न के बाद सूर्यास्त तक
    इसी शास्त्रीय जिज्ञासा का समाधान निर्णयसिन्धु, धर्मसिन्धु, कालमाधव एवं स्मृतिग्रंथों के प्रमाणों के आधार पर निम्नलिखित रिपोर्ट में प्रस्तुत किया जा रहा है।

संक्रांति विवरण
दिनांक: 14 जनवरी 2026
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश: सायं 03:07 बजे से

निर्णयसिन्धु, धर्मसिन्धु एवं कालमाधव इन तीनों ग्रंथों का स्पष्ट मत है कि यदि संक्रांति मध्याह्न के बाद हो, तो पुण्यकाल अगले दिन माना जाता है।

शास्त्रीय प्रमाण
निर्णयसिन्धु

मध्याह्नात् परतो यत्र संक्रान्तिः स्यात् दिनान्तरे।
तदा पूर्वदिने नास्ति, उत्तरे पुण्यकालकः॥
अर्थ
यदि संक्रांति मध्याह्न के बाद घटित हो,
तो उसी दिन पुण्यकाल नहीं होता,
अगले दिन ही पुण्यकाल मान्य होता है।

धर्मसिन्धु
धर्मसिन्धु भी मध्याह्नोत्तर संक्रांति की स्थिति में
दान-स्नान अगले दिन करने को ही श्रेष्ठ मानता है।

कालमाधव
कालमाधव में स्पष्ट किया गया है कि पुण्यकाल का निर्धारण तिथि से नहीं, बल्कि संक्रांति के समय (पूर्व या पश्चात् मध्याह्न) से होता है।

स्नान–दान का शुद्ध एवं फलदायी समय
14 जनवरी 2026 (संक्रांति का दिन)
इस दिन सामान्य पूजन संभव है।लेकिन पूर्ण पुण्यकाल मान्य नहीं
15 जनवरी 2026 (अगला दिन)
ब्रह्ममुहूर्त से पूरे दिन तक यही मुख्य एवं शास्त्रसम्मत पुण्यकाल है

क्या करें (शास्त्रानुसार)
ब्रह्ममुहूर्त में गंगा, यमुना, सरस्वती अथवा किसी पवित्र जल में स्नान
सूर्य को अर्घ्य –
ॐ घृणि सूर्याय नमः
तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र, पात्र का दान

क्या न करें
मध्याह्नोत्तर संक्रांति के दिन ही दान को पूर्ण पुण्य मानकर भ्रमित न हों केवल कैलेंडर देखकर निर्णय न लें, शास्त्र ही प्रमाण हैं

निष्कर्ष (शास्त्रीय निर्णय)
14 जनवरी 2026 को सायं 03:07 बजे मकर संक्रांति होने के कारण, शास्त्रानुसार पुण्यकाल 15 जनवरी 2026 को ही मान्य होगा, स्नान-दान-तर्पण का श्रेष्ठ समय अगले दिन ब्राह्ममुहूर्त है।

Samvad 24 Office
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