रिकॉर्डों का पहाड़, देवदत्त पडिक्कल ने विजय हजारे ट्रॉफी में रचा ऐसा इतिहास, जो आज तक कोई नहीं कर सका
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संवाद 24 डेस्क।भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक बार फिर से ऐसा कारनामा हुआ है, जिसने पूरे क्रिकेट जगत को चौंका दिया है। कर्नाटक के स्टार बल्लेबाज़ देवदत्त पडिक्कल ने विजय हजारे ट्रॉफी के मौजूदा सीज़न में अपने बल्ले से इतिहास लिख दिया है। उन्होंने ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जो न सिर्फ अनोखा है बल्कि आने वाले कई सालों तक याद रखा जाएगा। पडिक्कल अब विजय हजारे ट्रॉफी के एक ही सीज़न में 700 से ज़्यादा रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
700 के पार पहुंचा बल्ला, टूटा पुराना इतिहास
विजय हजारे ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में लगातार रन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन देवदत्त पडिक्कल ने इस चुनौती को बेहद सहज अंदाज़ में पार किया। इस सीज़न में उन्होंने 700 रन का आंकड़ा पार कर यह साबित कर दिया कि वह मौजूदा दौर के सबसे भरोसेमंद और तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज़ों में से एक हैं। इससे पहले कोई भी खिलाड़ी इस टूर्नामेंट के एक सीज़न में इस मुकाम तक नहीं पहुंच सका था।
क्वार्टर फाइनल में आया ऐतिहासिक पल
यह ऐतिहासिक उपलब्धि उस समय आई, जब कर्नाटक और मुंबई के बीच अहम क्वार्टर फाइनल मुकाबला खेला जा रहा था। दबाव भरे इस मैच में देवदत्त पडिक्कल ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए नाबाद पारी खेली। जैसे ही उन्होंने अपने रन पूरे किए, मैदान पर मौजूद दर्शकों ने खड़े होकर तालियों से उनका स्वागत किया।
पूरे टूर्नामेंट में दिखी निरंतरता
पडिक्कल की सबसे बड़ी खासियत इस सीज़न उनकी निरंतरता रही। उन्होंने लगभग हर मैच में टीम को ठोस शुरुआत दी। बड़े स्कोर खड़े करने के साथ-साथ उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में विकेट भी संभाले। यही वजह रही कि कर्नाटक की टीम पूरे टूर्नामेंट में संतुलित और आत्मविश्वास से भरी हुई नज़र आई।
शतकों और बड़ी पारियों की झड़ी
इस सीज़न में देवदत्त पडिक्कल के बल्ले से कई यादगार पारियां देखने को मिलीं। कहीं उन्होंने आक्रामक अंदाज़ में गेंदबाज़ों की धज्जियां उड़ाईं, तो कहीं परिस्थितियों के अनुसार टिककर रन बनाए। उनके शतक और अर्धशतक न सिर्फ आंकड़ों में दर्ज हुए, बल्कि टीम की जीत की कहानी भी लिखते चले गए।
तकनीक, धैर्य और आक्रमण का परफेक्ट मेल
क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि पडिक्कल की सफलता के पीछे उनकी मजबूत तकनीक और शांत दिमाग सबसे बड़ा कारण है। वह गेंद को आखिरी समय तक देखते हैं, गलत शॉट्स से बचते हैं और मौका मिलते ही स्ट्राइक रोटेट करते हैं। जरूरत पड़ने पर वह तेजी से रन बनाने में भी पीछे नहीं रहते।
कर्नाटक की सफलता की रीढ़ बने पडिक्कल
कर्नाटक की टीम इस सीज़न में जिस मजबूती के साथ आगे बढ़ी, उसके केंद्र में देवदत्त पडिक्कल रहे। ओपनिंग में मिले उनके ठोस रन टीम को आत्मविश्वास देते रहे। मिडिल ऑर्डर को खुलकर खेलने का मौका मिला और गेंदबाज़ों पर से दबाव भी कम हुआ।
सेमीफाइनल की राह हुई आसान
पडिक्कल की शानदार बल्लेबाज़ी का सीधा असर कर्नाटक की जीत पर पड़ा। टीम ने क्वार्टर फाइनल जीतकर सेमीफाइनल में जगह बनाई और खिताब की ओर एक और कदम बढ़ाया। हर मैच के साथ टीम का मनोबल बढ़ता गया और दर्शकों को भी एक मज़बूत दावेदार देखने को मिला।
चयनकर्ताओं की नज़र में आए पडिक्कल
इस प्रदर्शन के बाद देवदत्त पडिक्कल का नाम एक बार फिर बड़े मंचों के लिए चर्चा में आ गया है। घरेलू क्रिकेट में इस तरह की निरंतरता किसी भी खिलाड़ी को खास बना देती है। चयनकर्ताओं की नज़रें अब उनके हर मैच पर टिकी हुई हैं और माना जा रहा है कि आने वाले समय में उनके लिए नए दरवाज़े खुल सकते हैं।
भविष्य के लिए बड़ा संदेश
पडिक्कल का यह रिकॉर्ड सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। यह दिखाता है कि अगर मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास हो तो घरेलू क्रिकेट भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की मजबूत सीढ़ी बन सकता है।देवदत्त पडिक्कल ने विजय हजारे ट्रॉफी के इस सीज़न में जो कर दिखाया है, वह भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो चुका है। 700 से ज्यादा रन बनाकर उन्होंने न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि यह भी साबित किया कि वह बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं। अब सभी की निगाहें उनके अगले मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां वह एक बार फिर अपने बल्ले से इतिहास रच सकते हैं।






