सोमनाथ से मोदी का कड़ा संदेश, सनातन की शक्ति को कम आंकने वालों के लिए सख्त चेतावनी
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संवाद 24 डेस्क। गुजरात के पावन सोमनाथ मंदिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा तीखा और वैचारिक संदेश दिया, जिसे भारत विरोधी ताकतों और कट्टरपंथी सोच के खिलाफ सीधी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सोमनाथ का इतिहास पराजय नहीं, बल्कि विजय, पुनर्निर्माण और सनातन धैर्य का इतिहास है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन मजहबी आक्रांताओं ने सोमनाथ को नष्ट करने का प्रयास किया, वे आज इतिहास के कुछ पन्नों तक सिमट कर रह गए हैं, जबकि सोमनाथ आज भी उसी समुद्र तट पर गर्व के साथ धर्मध्वजा थामे खड़ा है। उन्होंने कहा कि यह समयचक्र का प्रमाण है, जो बताता है कि सनातन को मिटाने की सोच हमेशा विफल हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने आक्रांताओं के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब तक यह समझते रहे कि उनकी तलवारें सोमनाथ को पराजित कर देंगी, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि ‘सोम’ यानी अमृत से जुड़ा यह तीर्थ केवल एक संरचना नहीं, बल्कि चैतन्य शक्ति का केंद्र है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ की आत्मा को नष्ट नहीं किया जा सकता।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने आज के दौर की साजिशों की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज तलवारों की जगह नए-नए कुटिल तरीकों से भारत को कमजोर करने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने साफ कहा कि देश को अब और अधिक सतर्क, संगठित और शक्तिशाली बनने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री के इस बयान को बांग्लादेश की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जहां अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर भारत विरोधी माहौल बनाने और वहां अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे हमलों की अनदेखी करने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे समय में सोमनाथ से दिया गया यह भाषण केवल धार्मिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और वैचारिक संदेश माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने तुष्टीकरण की राजनीति पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी ऐसी ताकतें सक्रिय रहीं, जिन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध किया और आक्रमणकारी इतिहास को सफेद करने का प्रयास किया। उन्होंने याद दिलाया कि सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प और राष्ट्रवादी चेतना के चलते ही सोमनाथ का पुनर्निर्माण संभव हो पाया।
प्रधानमंत्री के शब्दों में, सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, उसकी स्मृति और उसकी चेतावनी है—कि सनातन को चुनौती देने वाली हर ताकत अंततः समाप्त हो जाती है, जबकि भारत की सांस्कृतिक शक्ति युगों-युगों तक खड़ी रहती है।






