राजनीतिक तनाव बढ़ा: सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर हमले की रिपोर्ट के लिए गृह मंत्रालय ने मांगी विस्तृत जानकारी
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संवाद 24 डेस्क। पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर कथित हमले के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। शनिवार शाम मेदिनीपुर के चंद्रकोना रोड पर अधिकारियों के काफिले पर हुई घटना की केंद्र सरकार की नजर तेज़ हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने राज्य सरकार से घटना की विस्तृत रिपोर्ट और वीडियो फुटेज मांगी है, जिससे कि असली परिस्थितियों का सटीक पता लगाया जा सके।
क्या हुआ? घटना का संक्षिप्त विवरण
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी, जो भाजपा की तरफ से प्रमुख विरोधी आवाज़ हैं, पुरुलिया से लौटते समय अपने काफिले के साथ चंद्रकोना रोड के पास थे। भाजपा की ओर से दावा किया गया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) समर्थकों ने अधिकारी के काफिले को रास्ता रोकते हुए उनके वाहन पर बांस की लाठियों से हमला किया और लगभग एक घंटे तक रास्ता ब्लॉक किया। अधिकारी ने यह हमला पुलिस की मौजूदगी में होने का आरोप लगाया है, जिस पर पुलिस ने किसी प्रकार का ठोस हस्तक्षेप नहीं किया।
भाजपा का कहना है कि उनकी बुलेटप्रूफ गाड़ी ने सुरक्षा दी, अन्यथा परिणाम और गंभीर हो सकता था। अधिकारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर TMC समर्थकों को जिम्मेदार बताया और राज्य सरकार तथा पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाया।
गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया
घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार और अधिकारी के कार्यालय से पूरी रिपोर्ट, दस्तावेज़ और उपलब्ध वीडियो फुटेज की मांग की है। अधिकारियों के बयान के अनुसार, रिपोर्ट तैयार कर भेजी जा रही है। गृह मंत्रालय का कहना है कि इसे लेकर विस्तृत जांच की आवश्यकता है ताकि पता चल सके कि घटना कैसे और किन परिस्थितियों में हुई।
राजनीतिक विवाद और दोनों दलों की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद राजनीतिक विवाद और तेज़ हो गया है:
भाजपा का आरोप है कि यह हमला राज्य सरकार की हिंसा और दंडमुक्ति की संस्कृति का परिणाम है, और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया है। उन्होंने पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, अभी तक TMC की ओर से स्पष्ट तौर पर इस घटना के संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पिछली बार इस तरह की घटनाओं के बाद पार्टी ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। (पिछले विवादों में TMC ने इस तरह की घटनाओं को “बीजेपी का रचा हुआ नाटक” करार दिया था, जैसे कि पिछले मामलों में देखा गया)
राजनीतिक महत्त्व और आगे की छानबीन
यह घटना पश्चिम बंगाल में राजनीतिक संघर्ष और कानून-व्यवस्था पर सवालों को फिर से जोरदार तरीके से उठाती है, खासकर आगामी चुनावों से पहले। विपक्षी नेताओं द्वारा पुलिस और राज्य सरकार पर आरोप लगाने के साथ ही केंद्र सरकार की निगरानी से यह मामला और व्यापक रूप ले रहा है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट मांग से साफ़ संकेत मिलता है कि केंद्र इस घटना को गंभीरता से ले रहा है और इसे राजनीतिक व प्रशासनिक दृष्टिकोण से परखा जाएगा।
अंततः हम कह सकते हैं कि सुवेंदु अधिकारी के काफिले पर हमले का मामला सिर्फ़ एक स्थानीय घटना नहीं रहा, यह अब राज्य और केंद्र के बीच एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट माँगने की कार्रवाई से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार स्थिति की वास्तविकता जानना चाहती है ताकि सवालों के जवाब मिल सकें और किसी भी तरह की भ्रांतियों का निपटारा किया जा सके।






