बंदरों का बढ़ता आतंक आगरा के गढ़ी बाईपुर में 9 साल की मासूम तान्या की जान पर बन आई, छह महीने में तीन मौतें

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संवाद 24 संवाददाता। आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र के गांव गढ़ी बाईपुर में अब बंदर सिर्फ शरारत नहीं, बल्कि जानलेवा खतरा बन चुके हैं। शनिवार शाम करीब 5 बजे, 9 साल की नन्ही तान्या छत पर कपड़े सुखाने गई थी। अचानक बंदरों के झुंड ने उस पर हमला बोल दिया। डर और धक्के से बच्ची छत से नीचे गिर पड़ी। पक्के फर्श पर जोरदार चोट लगी। उसकी चाची उसे बचाने दौड़ीं, तो बंदरों ने उन पर भी हमला कर दिया। परिजनों ने डंडे दिखाकर बंदरों को भगाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

तान्या को सिकंदरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। एमआरआई में पता चला कि पेट में अंदरूनी चोट से खून भर गया है। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी है। बच्ची की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

परिवार की आपबीती और गांव का दर्द
तान्या के चाचा जितेंद्र ने बताया कि वे और उनके बड़े भाई महेशचंद्र एक ही मकान में रहते हैं। शाम को तान्या छत पर गई, तभी बंदरों ने हमला कर दिया। “बंदरों ने उसे धक्का दिया और नीचे फेंक दिया। चाची बचाने गईं तो उन पर भी झपट पड़े।” परिवार का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है।

गांव में पिछले छह महीनों में बंदरों के हमले से जुड़ी पांच घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें तीन लोगों की मौत हो गई। रक्षाबंधन के दिन एक महिला बंदरों से बचने के चक्कर में दूसरी मंजिल से गिर गईं और सिर फटने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग या स्थानीय प्रशासन ने अब तक बंदरों को पकड़ने या उन्हें गांव से दूर करने का कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

आगरा में बंदरों का बढ़ता संकट
आगरा में बंदरों का आतंक नया नहीं है। शहर के साथ-साथ आसपास के गांवों में भी बंदरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आसानी से खाना मिलने, जंगलों में जगह कम होने और लोगों द्वारा चारा-पानी देने से ये और आक्रामक हो गए हैं। आगरा में पहले भी कई बार बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं बंदरों के हमले में छत से गिरकर घायल या मृत हो चुके हैं। हाल के वर्षों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन समाधान अभी तक दूर है।

सवाल उठते हैं, जवाब कौन देगा?
छह महीने में तीन मौतें और पांच हादसे क्या इतना इंतजार काफी नहीं?
क्या प्रशासन अब भी चुप रहेगा जब तक और मासूम जिंदगियां खतरे में नहीं पड़तीं?

बंदरों को पकड़कर दूर छोड़ने, स्टेरलाइजेशन या अन्य प्रभावी तरीकों पर कार्रवाई कब होगी?

यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे इलाके के डर और लाचारी की कहानी है। तान्या की रिकवरी के लिए दुआएं और बंदरों के इस आतंक पर जल्द रोक लगने की उम्मीद।

जब मासूम छत पर कपड़े सुखाने जाती है, तो उसकी जान खतरे में क्यों पड़नी चाहिए? समय आ गया है कि इस समस्या को गंभीरता से लिया जाए, वरना और कितनी तान्या की कहानी दर्दनाक मोड़ लेगी।

Deepak Singh
Deepak Singh

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