रिश्तों की सबसे पवित्र सीमा भी लांघ दी गई: कानपुर में 13 साल की मासूम की चीख अनसुनी रह गई
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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश का कानपुर शहर, जो कभी औद्योगिक गति और सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता था, आज एक बार फिर इंसानियत के चेहरे पर काले धब्बे की तरह एक दिल दहला देने वाली घटना से रूबरू हुआ है। बर्रा थाना क्षेत्र की एक छोटी-सी बस्ती में, जहां किराए के मकान की दीवारें भी गरीबी और मजबूरी की कहानी कहती हैं, वहां 13 वर्षीय एक नाबालिग किशोरी ने अपने ही सगे ताऊ के हाथों लगातार यौन शोषण का दर्द सहा। यह वह उम्र है जब बच्चियां सपनों में स्कूल की घंटी, दोस्तों की हंसी और मां की गोद की कल्पना करती हैं, लेकिन इस मासूम की जिंदगी में तो बस डर, शर्म और अंधेरा ही बाकी रह गया।
परिवार की तबाही की शुरुआत
करीब एक साल पहले इस बच्ची के पिता की हत्या हुई। पुलिस ने हत्या के आरोप में मां को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मां के जेल जाने के बाद छोटी किशोरी और उसके छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी उनके बुजुर्ग दादा (बाबा) और ताऊ पर आ गई। घर में कोई और सहारा नहीं था। किराए के मकान में चारों तरफ बस मजबूरी और असहायता का माहौल।
ताऊ ने इसी मजबूरी का फायदा उठाया। लगभग एक साल पहले भी उसने नशे की हालत में बच्ची के साथ गलत हरकत की कोशिश की थी। डरी-सहमी बच्ची ने रोते हुए अपनी बात बाबा को बताई। बाबा ने बस ताऊ को फटकार लगाई और मामले को दबा दिया। लेकिन ताऊ नहीं रुका। वह बार-बार बच्ची को अकेला पाकर उसका शोषण करता रहा। बच्ची डर के मारे चुप रही। कौन सुनता? कौन बचाता?
वह शाम जब सच बाहर आया
गुरुवार शाम को ताऊ ने एक बार फिर बच्ची को घर में अकेला पाकर अपनी हैवानियत दोहराने की कोशिश की। लेकिन इस बार किस्मत ने साथ दिया। पड़ोस की एक महिला अचानक वहां पहुंच गई और पूरी घटना देख ली। बच्ची बदहवास हालत में पड़ोसन के घर पहुंची और रोते हुए सब बता दिया। पड़ोसन ने तुरंत यूपी-112 पर कॉल किया।
पुलिस मौके पर पहुंची। बच्ची ने बाबा की मौजूदगी में पूरी आपबीती सुना दी। उसकी आवाज में डर था, शर्म थी, लेकिन सबसे ज्यादा था एक लंबे अरसे से दबा हुआ दर्द। पुलिस ने तुरंत दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया। आरोपी ताऊ को गिरफ्तार कर लिया गया।
सवाल हमारे समाज से
यह सिर्फ एक घटना नहीं है। यह उस समाज की तस्वीर है
मां जेल में है तो बेटी असुरक्षित हो जाती है
रिश्ते की आड़ में हैवानियत होती है
बच्ची की पहली शिकायत को फटकार में दबा दिया जाता है
और सबसे बड़ी बात – बाबा भी चुप रह जाते हैं
क्या हमारा समाज इतना कमजोर हो चुका है कि एक बच्ची को बचाने के लिए किसी की हिम्मत नहीं जुट पाती?
आखिरी उम्मीद
पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की, यह सराहनीय है। लेकिन असली न्याय तब होगा जब:
आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिले
बच्ची को सुरक्षित माहौल, काउंसलिंग और भविष्य मिले
और सबसे जरूरी – ऐसे घरों में जहां माता-पिता नहीं होते, वहां बच्चों की सुरक्षा के लिए समाज और प्रशासन जागरूक बने
एक 13 साल की बच्ची की चीख अब पूरी दुनिया सुन रही है। सवाल यह है – क्या हम उसकी आंखों में देखकर फिर भी चुप रहेंगे?






