नए साल की शुरुआत में बड़ा झटका, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 10 अरब डॉलर घटा
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संवाद 24 बिज़नेस डेस्क। नए साल 2026 की शुरुआत भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के लिए शुभ नहीं रही। लगातार चार सप्ताह की बढ़त के बाद अब भंडार में तेज गिरावट दर्ज की गई है। Reserve Bank of India (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2 जनवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 9.809 अरब डॉलर की भारी कमी आई है।
इस गिरावट के साथ देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 686.801 अरब डॉलर पर आ गया है। इससे एक सप्ताह पहले भंडार में 3.29 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। गौरतलब है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर 2024 में 704.885 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर तक पहुंचा था।
फॉरेन करेंसी एसेट्स में सबसे बड़ी गिरावट
आरबीआई के साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक, आलोच्य सप्ताह में सबसे अधिक दबाव Foreign Currency Assets (FCA) पर देखने को मिला। इस दौरान एफसीए में 7.622 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई, जबकि इससे पिछले सप्ताह इसमें मामूली बढ़त देखने को मिली थी।
अब भारत का एफसीए घटकर 551.990 अरब डॉलर रह गया है। एफसीए कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होता है, जिसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य मुद्राओं में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल रहता है।
सोने के भंडार में भी कमी
समीक्षाधीन सप्ताह में भारत के गोल्ड रिजर्व में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। आरबीआई के अनुसार, 2 जनवरी को समाप्त सप्ताह में सोने के भंडार के मूल्य में 2.058 अरब डॉलर की कमी आई है। इसके साथ ही सोने का कुल मूल्य घटकर 111.262 अरब डॉलर रह गया है।
हालांकि, मात्रा के लिहाज से आरबीआई के पास सोने का भंडार 880 टन से अधिक बना हुआ है, जो देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 14.7 प्रतिशत हिस्सा है।
SDR और IMF रिजर्व में भी गिरावट
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, भारत के Special Drawing Rights (SDR) में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई है। इस सप्ताह एसडीआर में 25 मिलियन डॉलर की कमी आई, जिससे यह घटकर 18.778 अरब डॉलर रह गया।
इसके अलावा International Monetary Fund (IMF) के पास रखे गए भारत के रिजर्व में भी 105 मिलियन डॉलर की गिरावट आई है। इसके बाद IMF के पास भारत का रिजर्व घटकर 4.771 अरब डॉलर रह गया है।
क्या संकेत देती है गिरावट
विशेषज्ञों के मुताबिक, डॉलर की मजबूती, वैश्विक अनिश्चितता और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव का असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा है। हालांकि, मौजूदा स्तर अब भी भारत को बाहरी झटकों से निपटने के लिए मजबूत स्थिति में रखता है, लेकिन नए साल की शुरुआत में आई यह गिरावट नीति निर्माताओं के लिए सतर्क रहने का संकेत जरूर देती है।






