डिजिटल फ्रॉड देशव्यापी खतरा बनता जा रहा है: आरबीआई गवर्नर ने बैंकों को चेताया, सख्ती और समन्वय पर दिया जोर
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संवाद 24 बिज़नेस डेस्क। देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को लेकर Reserve Bank of India (RBI) ने गंभीर चिंता जताई है। आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि डिजिटल धोखाधड़ी अब सिर्फ बैंकिंग सेक्टर की नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। उन्होंने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से इस खतरे पर सामूहिक और ठोस कार्रवाई करने का आह्वान किया।
‘नियमों की भावना समझना जरूरी’
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि बैंकों को नियामकीय निर्देशों को केवल औपचारिकता के तौर पर लागू नहीं करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, “नियमों के पीछे जो असल मकसद और भावना है, उसे समझना और जमीन पर उतारना ज्यादा जरूरी है।”
डिजिटल सुविधा के साथ बढ़ा जोखिम
मल्होत्रा ने माना कि डिजिटल माध्यमों से बैंकिंग सेवाएं आम लोगों तक तेजी से पहुंची हैं और वित्तीय समावेशन को मजबूती मिली है। लेकिन इसके साथ ही साइबर सुरक्षा में चूक, ग्राहकों से छिपे हुए शुल्क, अधूरी जानकारी और कर्ज वसूली के गलत तरीकों जैसे जोखिम भी बढ़े हैं, जिनका सीधा नुकसान उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है।
म्यूल अकाउंट्स पर कड़ा रुख
आरबीआई गवर्नर ने बैंकों को आगाह किया कि डिजिटल फ्रॉड में म्यूल अकाउंट्स (फर्जी या किराये के खाते) बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों को आपस में बेहतर तालमेल स्थापित करना होगा ताकि संदिग्ध खातों और लेन-देन की पहचान समय रहते की जा सके और नुकसान को रोका जा सके।
तकनीक आधारित निगरानी की जरूरत
डेटा और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देते हुए गवर्नर ने कहा कि अब ऐसी प्रणालियां विकसित की जानी चाहिए, जिससे रीयल-टाइम निगरानी संभव हो और जोखिमों का पहले ही पता लगाया जा सके। उनका कहना था कि डिजिटल बैंकिंग के दौर में पारंपरिक निगरानी मॉडल पर्याप्त नहीं हैं।
आरबीआई के इस बयान को बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। केंद्रीय बैंक का साफ संदेश है कि अगर डिजिटल फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो इससे न केवल ग्राहकों का भरोसा टूटेगा, बल्कि पूरे वित्तीय तंत्र पर असर पड़ेगा।






