‘वकीलों के लिए नैतिकता का पैमाना ऊंचा’: सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल चुनाव से जुड़ी याचिका खारिज की
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संवाद 24 नई दिल्ली। Supreme Court of India ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं के लिए नैतिक मूल्यों और आचरण के मानक सामान्य नागरिकों की तुलना में कहीं अधिक ऊंचे होते हैं। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने तेलंगाना के एक वरिष्ठ अधिवक्ता की वह याचिका सुनने से इनकार कर दिया, जिसमें लंबित आपराधिक शिकायतों के आधार पर उन्हें राज्य बार काउंसिल का चुनाव लड़ने से रोके जाने को चुनौती दी गई थी।
बार काउंसिल चुनाव पर कोर्ट का सख्त रुख
जस्टिस Surya Kant की अगुआई वाली पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता ऐसा व्यक्ति प्रतीत नहीं होता, जिसे बार काउंसिल जैसे पेशेवर और नियामक निकाय के चुनाव में उतरने की अनुमति दी जानी चाहिए। अदालत तेलंगाना हाई कोर्ट के प्रमुख अधिवक्ता रापोलु भास्कर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
भास्कर ने राज्य बार काउंसिल के उन प्रावधानों को चुनौती दी थी, जिनके तहत लंबित आपराधिक शिकायतों वाले अधिवक्ताओं को अयोग्य ठहराया जा सकता है।
‘दोष सिद्ध न होने’ की दलील पर टिप्पणी
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उन्हें किसी भी मामले में न तो दोषी ठहराया गया है और न ही सजा सुनाई गई है। इस पर पीठ ने कहा कि अधिवक्ताओं के लिए नैतिकता का पैमाना कहीं अधिक कठोर होता है, क्योंकि वे न्याय व्यवस्था के अभिन्न अंग हैं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि अक्सर वकील ही अदालतों का दरवाजा खटखटाते हैं जब किसी दागी व्यक्ति को आम चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाती है।
POCSO मामले में जमानत पर सख्त संदेश
इसी दिन एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों में जमानत के दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई। जस्टिस B. V. Nagarathna की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश के शामली जिले के एक आरोपी को Allahabad High Court से मिली जमानत को रद्द कर दिया।
पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में जमानत के बाद साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका वास्तविक और गंभीर चिंता का विषय है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
न्यायपालिका का संदेश
दोनों फैसलों के जरिए शीर्ष अदालत ने साफ संकेत दिया है कि चाहे पेशेवर नैतिकता का प्रश्न हो या बच्चों की सुरक्षा का—न्यायपालिका किसी भी स्तर पर समझौते के पक्ष में नहीं है। वकीलों से अपेक्षा की जाती है कि वे कानून के संरक्षक के रूप में उच्चतम नैतिक मानकों का पालन करें।






