कड़ाके की सर्दी को भी परास्त कर रही कल्पवासियों की अटूट आस्था
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संवाद 24 संवाददाता। मेला श्री रामनगरिया की ख्याति यूं ही नहीं है। यहां कल्पवासियों और साधु-संतों की तपस्या के आगे इस बार की रिकॉर्ड तोड़ ठंड भी बेबस नजर आ रही है। जब पारा लगातार नीचे खिसक रहा है और आम जनजीवन ठिठुर रहा है, तब भी आस्था की गर्मी गंगा तट पर साफ दिखाई दे रही है।
सुबह तड़के चार बजे से ही श्रद्धालु नंगे पैर गंगा स्नान के लिए घाटों की ओर दौड़ पड़ते हैं। ठंडी हवाओं और कंपकंपाती सर्दी के बीच श्रद्धालु ‘गंगा मैया की जय’ के जयकारे लगाते हुए हल्के वस्त्रों में, कई बार नंगे बदन ही, स्नान करते नजर आते हैं। यह दृश्य आस्था, श्रद्धा और तप का जीवंत उदाहरण बन गया है।
मेला श्री रामनगरिया में इस समय करीब 30 से 35 हजार साधु-संत और कल्पवासी डेरा डाले हुए हैं। माघ मास भर कल्पवासी यहां रहकर गंगा मैया की साधना करेंगे। मेले का दृश्य इन दिनों बेहद अनुपम और आध्यात्मिक आभा से परिपूर्ण है। घाटों से लेकर साधुओं के आश्रमों तक हर ओर ध्यान, जप और अनुष्ठानों की गूंज सुनाई देती है।
स्नान के बाद श्रद्धालु अपने-अपने तंबुओं में जाकर ध्यान करते हैं और साधु-संतों से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। विभिन्न अखाड़ों में धर्म और अध्यात्म की छटा बिखरी हुई है। देर रात तक श्रद्धालुओं की मौजूदगी से मेला क्षेत्र का माहौल भक्तिमय और आनंदित बना रहता है।
मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। हजारों कल्पवासियों और रोजाना बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या खुराफात से निपटने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। कानपुर से लाई गई गिवी डॉग टीम भी मेला क्षेत्र में तैनात की गई है। अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल लगातार भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहा है।
कुल मिलाकर, मेला श्री रामनगरिया न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि यह दिखा रहा है कि जब श्रद्धा सच्ची हो, तो कड़ाके की सर्दी भी उसके सामने हार मान लेती है।






