UAPA पर ओवैसी का कांग्रेस पर तीखा हमला: बोले, जिस कानून को बनाया, आज उसी में युवा सड़ रहे हैं जेल में
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संवाद 24 नई दिल्ली। दिल्ली दंगा मामले में जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत न मिलने के बाद सियासत तेज हो गई है। इस फैसले को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस पार्टी पर सीधा हमला बोला है। ओवैसी ने कहा कि जिस सख्त कानून के तहत आज युवाओं को वर्षों तक जेल में रखा जा रहा है, उसे बनाने की जिम्मेदारी कांग्रेस की ही है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं, ऐसे में जमानत संभव नहीं है।
“कांग्रेस ने बनाया, खामियाजा युवा भुगत रहे”
ओवैसी ने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के दौरान UAPA में ऐसे संशोधन किए गए, जिनकी उन्होंने संसद में खुलकर आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की परिभाषा में “किसी भी अन्य तरीके से, चाहे वह किसी भी प्रकृति का हो” जैसे शब्द जोड़ दिए गए, जिससे कानून की व्याख्या बेहद व्यापक हो गई और उसके दुरुपयोग की गुंजाइश बढ़ी।
ओवैसी ने कहा, “मैंने लोकसभा में चेतावनी दी थी कि इस कानून का गलत इस्तेमाल होगा। आज वही हो रहा है। एक नौजवान साढ़े पांच साल से जेल में है और जमानत तक नहीं मिल पा रही।”
180 दिन की हिरासत और जमानत की मुश्किल
ओवैसी ने UAPA की धारा 43D का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत चार्जशीट दाखिल होने से पहले 180 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है। उनका आरोप है कि इस प्रावधान का सबसे अधिक असर अल्पसंख्यकों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि व्यवहारिक सच्चाई और कागजों पर लिखी उम्मीदों के बीच बड़ा अंतर है।
“वर्दी वालों के मन में नफरत”
अपने बयान में ओवैसी ने यह भी कहा कि व्यवस्था के भीतर “वर्दी वाले लोगों” के मन में एक खास तरह की नफरत काम करती है, जिसके कारण कठोर कानूनों का चयनात्मक इस्तेमाल होता है। उन्होंने दोहराया कि UAPA जैसे कानून में फंसने के बाद जमानत मिलना लगभग असंभव हो जाता है।
सियासी तापमान तेज
ओवैसी के इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी और अन्य दलों के बीच तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। जहां एक ओर कांग्रेस पर अपने ही बनाए कानून को लेकर कटघरे में खड़ा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार UAPA को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बता रही है।
दिल्ली दंगा मामला अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का भी बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां कानून, अधिकार और सत्ता तीनों आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं।






