पिता की विरासत का बोझ या प्रेरणा? ‘बॉर्डर 2’ से पहले आहान शेट्टी का बड़ा खुलासा
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संवाद 24 डेस्क। बॉलीवुड में स्टार किड होना जितना आसान समझा जाता है, असल जिंदगी में उतना ही चुनौतीपूर्ण भी होता है। मशहूर अभिनेता सुनील शेट्टी के बेटे और उभरते सितारे आहान शेट्टी ने हाल ही में स्वीकार किया है कि उन्हें अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का दबाव महसूस होता है। फिल्म बॉर्डर 2 को लेकर चर्चा में आए आहान ने खुलकर बताया कि यह दबाव कभी-कभी डर पैदा करता है, लेकिन यही डर उन्हें बेहतर बनने की प्रेरणा भी देता है।
स्टार किड होने की हकीकत
आहान शेट्टी ने माना कि फिल्मी परिवार से आने का मतलब सिर्फ मौके मिलना नहीं होता, बल्कि हर कदम पर तुलना भी होती है। दर्शक और इंडस्ट्री दोनों ही उनसे यह उम्मीद करते हैं कि वे अपने पिता जैसी सफलता और सम्मान हासिल करें। आहान के मुताबिक, यह अपेक्षाएं कभी-कभी मानसिक दबाव बढ़ा देती हैं।
सुनील शेट्टी की छवि: एक ऊँचा पैमाना
सुनील शेट्टी 90 के दशक के उन अभिनेताओं में रहे हैं, जिन्होंने एक्शन, इमोशन और पारिवारिक किरदारों में अपनी अलग पहचान बनाई। मोहरा, धड़कन, हेरा फेरी और बॉर्डर जैसी फिल्मों ने उन्हें दर्शकों के दिलों में अमर बना दिया। ऐसे में आहान के लिए इस छवि तक पहुँचना आसान नहीं है।
आहान शेट्टी का आत्ममंथन
आहान कहते हैं कि वे खुद को अपने पिता से तुलना करने की बजाय अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं। उनका मानना है कि विरासत को ढोना बोझ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। अगर वे ईमानदारी से मेहनत करेंगे, तो लोग उन्हें उनके काम के लिए पहचानेंगे, न कि सिर्फ उनके सरनेम के लिए।
बॉर्डर 2 से जुड़ी उम्मीदें
फिल्म बॉर्डर 2 आहान शेट्टी के करियर का सबसे अहम मोड़ मानी जा रही है। यह फिल्म सिर्फ एक सीक्वल नहीं, बल्कि देशभक्ति, बलिदान और जज़्बे की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम है। आहान जानते हैं कि यह फिल्म उनके लिए एक बड़ी परीक्षा है।
देशभक्ति फिल्मों का भावनात्मक दबाव
देशभक्ति पर बनी फिल्मों में अभिनय करना सिर्फ एक्टिंग नहीं, बल्कि भावना और जिम्मेदारी का विषय होता है। आहान का कहना है कि वे इस किरदार को निभाते समय सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक भारतीय नागरिक के रूप में सोचते हैं।
पिता से मिलने वाली सीख
सुनील शेट्टी अक्सर अपने बेटे को सलाह देते हैं कि सफलता से ज्यादा ज़रूरी है अनुशासन और विनम्रता। आहान मानते हैं कि उनके पिता ने कभी उन पर करियर को लेकर दबाव नहीं डाला, बल्कि हमेशा सही रास्ता चुनने की सीख दी।
नेपोटिज़्म पर आहान का नजरिया
नेपोटिज़्म को लेकर चल रही बहस पर आहान कहते हैं कि मौके मिलना एक बात है, लेकिन उन्हें टिकाए रखना मेहनत से ही संभव है। अगर दर्शकों को आपका काम पसंद नहीं आया, तो कोई भी नाम आपको बचा नहीं सकता।
खुद को साबित करने की जंग
आहान शेट्टी के लिए हर फिल्म खुद को साबित करने की लड़ाई है। वे मानते हैं कि पहली फिल्म के बाद असली परीक्षा शुरू होती है, क्योंकि तब दर्शकों की उम्मीदें और बढ़ जाती हैं।
नई पीढ़ी का अभिनेता, नई सोच
आहान खुद को सिर्फ एक एक्शन हीरो तक सीमित नहीं रखना चाहते। वे अलग-अलग जॉनर में काम करना चाहते हैं, ताकि दर्शक उन्हें एक बहुआयामी कलाकार के रूप में देखें।
मेंटल प्रेशर से निपटने का तरीका
आहान बताते हैं कि वे फिटनेस, पढ़ाई और खुद के साथ समय बिताकर मानसिक दबाव से निपटते हैं। उनके लिए जिम सिर्फ शरीर नहीं, बल्कि दिमाग को मजबूत रखने का जरिया भी है।
दर्शकों से सीधा रिश्ता
आहान का मानना है कि आज के दौर में सोशल मीडिया ने कलाकार और दर्शक के बीच की दूरी खत्म कर दी है। सकारात्मक प्रतिक्रियाएं उन्हें प्रेरित करती हैं, जबकि आलोचना उन्हें खुद को सुधारने का मौका देती है।
भविष्य की राह
बॉर्डर 2 के बाद आहान कई नए प्रोजेक्ट्स को लेकर उत्साहित हैं। वे चाहते हैं कि आने वाले वर्षों में उनका नाम किसी पहचान का मोहताज न रहे, बल्कि उनके काम से खुद बोले।
विरासत से आगे की सोच
आहान शेट्टी के लिए सुनील शेट्टी का नाम एक मजबूत नींव है, लेकिन इमारत उन्हें खुद खड़ी करनी है। वे मानते हैं कि विरासत सम्मान देती है, लेकिन सफलता का रास्ता सिर्फ मेहनत से होकर जाता है।
युवाओं के लिए संदेश
आहान युवाओं को सलाह देते हैं कि तुलना करने की बजाय खुद पर भरोसा रखें। दबाव हर किसी की जिंदगी में आता है, लेकिन वही दबाव अगर सही दिशा में ले जाया जाए, तो सफलता की सीढ़ी बन सकता है।आहान शेट्टी का यह कबूलनामा बताता है कि स्टार किड होना जितना ग्लैमर से भरा दिखता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। बॉर्डर 2 उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि खुद को साबित करने का मौका है। आने वाला वक्त तय करेगा कि वे अपने पिता की विरासत को किस तरह नई ऊँचाइयों तक ले जाते हैं।






