हैलट में दलालों का खेल बेनकाब हेपेटाइटिस पॉजिटिव मरीज को थमाई गई फर्जी निगेटिव रिपोर्ट
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संवाद 24 संवाददाता। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हैलट अस्पताल में एक बार फिर पैथोलॉजी दलालों के संगठित गिरोह का खतरनाक खेल सामने आया है। इस बार दलालों ने हदें पार करते हुए हेपेटाइटिस-सी पॉजिटिव मरीज को फर्जी निगेटिव रिपोर्ट थमा दी। मामला तब उजागर हुआ जब सर्जरी विभाग में एक रोगी की जांच प्रक्रिया के दौरान रिपोर्ट की सत्यता पर सवाल खड़े हुए।
जानकारी के मुताबिक, सर्जरी से पहले रूटीन जांच में रैपिड कार्ड टेस्ट के जरिए मरीज हेपेटाइटिस-सी पॉजिटिव पाया गया था। इसके बाद वायरल लोड की पुष्टि के लिए जूनियर डॉक्टर ने एलाइजा जांच कराने के निर्देश दिए। एलाइजा जांच में सामान्यतः तीन घंटे या उससे अधिक समय लगता है, लेकिन इसी दौरान पैथोलॉजी दलाल सक्रिय हो गया।
आधे घंटे में आई ‘निगेटिव’ रिपोर्ट
जांच पर्ची मिलते ही दलाल ने मरीज के परिजनों से संपर्क किया, ब्लड सैंपल और रुपये लेकर बाहर चला गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि मात्र आधे घंटे के भीतर ही हेपेटाइटिस-सी निगेटिव की रिपोर्ट लाकर दे दी गई। इतनी कम समय में एलाइजा जांच संभव नहीं होने से मेडिकल स्टाफ को संदेह हुआ और मामले की जांच शुरू हुई।
जूनियर डॉक्टर पर लगे आरोप हुए खारिज
प्रारंभिक स्तर पर आरोप लगाया गया कि जूनियर डॉक्टर ने मरीज को बाहर से जांच कराने के लिए कहा था। इस पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने तत्काल जांच समिति गठित की। जांच रिपोर्ट में साफ हुआ कि जूनियर डॉक्टर ने जांच कॉलेज में ही कराने को कहा था, लेकिन दलाल ने मौका देखकर परिजनों को गुमराह किया और फर्जी रिपोर्ट थमा दी।
दलाल बना रहे मनमानी रिपोर्ट
सूत्रों का कहना है कि अस्पताल परिसर में सक्रिय दलाल सैंपल लेकर बाहर जाते हैं और कंप्यूटर पर मनचाही रिपोर्ट तैयार कर देते हैं। अनपढ़ या असहाय परिजन जल्दी रिपोर्ट मिलने के लालच में इन पर भरोसा कर लेते हैं, जबकि यह मरीज की जान और डॉक्टरों की साख—दोनों के लिए गंभीर खतरा बनता है।
प्राचार्य का सख्त रुख
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने कहा कि सर्जरी से पहले प्रत्येक मरीज की हेपेटाइटिस-बी, सी और एचआईवी की जांच अनिवार्य रूप से की जाती है। किसी भी पॉजिटिव रिपोर्ट की दो-तीन बार पुष्टि के बाद ही एलाइजा जांच कराई जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल में सभी जरूरी जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं और तीमारदार किसी भी बाहरी व्यक्ति या दलाल के झांसे में न आएं।
परिजनों ने दिए लिखित बयान
इस पूरे मामले में मरीज के परिजनों ने जांच टीम को लिखित बयान देकर दलाल की भूमिका की पुष्टि की है। प्रशासन ने अस्पताल परिसर में बाहरी लोगों की आवाजाही पर सख्ती के निर्देश दिए हैं।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
यह घटना न केवल अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मरीजों की जिंदगी से हो रहे खतरनाक खिलवाड़ को भी उजागर करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस दलाल गिरोह पर कब और कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।






