कंगारुओं ने इतिहास की नयी इबारत लिखी: सिडनी में एशेज 134 साल पुराने रिकॉर्ड को किया ध्वस्त
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संवाद 24 डेस्क। एशेज सीरीज के पांचवें और अंतिम टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने ऐसा इतिहास रचा है जो 134 वर्षों से किसी ने नहीं किया था। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) में मंगलवार को तीसरे दिन के खेल के अंत तक मेजबान टीम ने अपने प्रतिद्वंद्वी इंग्लैंड के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी और संयोजित साझेदारियों से न केवल बढ़त बनाई है, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के पुराने रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया है , एक पारी में सबसे ज्यादा 50+ रन की साझेदारियाँ रिकॉर्ड करने का अनोखा कारनामा।
यह वह उपलब्धि है जो 19वीं सदी के बाद से नहीं हुई थी। पिछले रिकॉर्ड में इंग्लैंड की टीम ने 1892 में एडिलेड टेस्ट में एक पारी में 6 बार 50 या उससे अधिक रन की साझेदारी की थी, लेकिन इस सोमवार को ऑस्ट्रेलिया ने इसे तोड़ा और एक पारी में 7 बार 50+ साझेदारी करके इस ऐतिहासिक माइलस्टोन को अपनी झोली में डाल दिया। ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे दिन के खेल खत्म होने तक 7 विकेट पर 518 रन बनाकर इंग्लैंड की पहली पारी 384 रन के मुकाबले 134 रन की मजबूत बढ़त हासिल कर ली। इस शानदार बल्लेबाजी के कारण कंगारू टीम ने न सिर्फ अपना दबदबा कायम किया, बल्कि इंग्लैंड को हार की कगार की ओर धकेल दिया।
आक्रमक पारी का नेतृत्व करते हुए ट्रेविस हेड ने 163 रन की धमाकेदार पारी खेली , जो उनकी इस सीरीज की तीसरी शतकीय पारी साबित हुई , और अभूतपूर्व अंदाज में इंग्लिश गेंदबाजों पर हावी रहे। उन्होंने केवल 105 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया और मैदान पर जबरदस्त दबाव बनाया। इसके साथ ही कप्तान स्टीव स्मिथ ने भी 129 रनों की नाबाद पारी खेली और इस शानदार पारी के साथ उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 13वां एशेज शतक जड़ते हुए कई रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं। इस शतकीय पारी ने उन्हें एशेज के इतिहास में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में ऊँचा स्थान दिलाया है।ऑस्ट्रेलिया की यह बल-भारी साझेदारी और बल्लेबाजों की दृढ़ता ने इंग्लैंड के खिलाफ यह टेस्ट स्थितियों के आधार पर बड़ा पल देने में अहम भूमिका निभाई। मैदान पर प्रदर्शित संयोजन, धैर्य और आक्रमकता ने मैच को एक ऐसे मोड़ पर ला दिया है जहाँ ऑस्ट्रेलिया के लिए जीत हासिल करना अब मुश्किल तो है नहीं, बल्कि लगभग सुनिश्चित जैसा दिख रहा है।
विशेष रूप से यह ऐतिहासिक उपलब्धि इसलिए भी यादगार है क्योंकि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में यह रिकॉर्ड केवल एक बार पूर्व में भारत ने 2007 में ओवल में हासिल किया था, और अब ऑस्ट्रेलिया ने उसी क्लब में खुद को शामिल किया है। इस नयी उपलब्धि ने क्रिकेट जगत में यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि एशेज जैसे परंपरागत और प्रतिष्ठित टॉर्नामेंट में इतिहास तोड़ना आज भी संभव है, बशर्ते टीम का सामंजस्य, बल्लेबाज़ी गहराई और रणनीति एक साथ काम करें।






