क्या यह पूर्वोत्तर में भूकंप की चेतावनी? असम में 5.1 तीव्रता का झटका, कई जिलों में हुआ महसूस, कोई नुकसान की रिपोर्ट नहीं

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संवाद 24 डेस्क। सुबह के शुरुआती घंटों में असम के मोरीगांव जिले में एक शक्तिशाली भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसने आसपास के कई हिस्सों में लोगों को भयभीत कर दिया और अचानक रात की नींद में ही घरों से बाहर निकलने को मजबूर कर दिया।नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) की रिपोर्ट के अनुसार, यह भूकंप रिक्टर स्केल पर 5.1 की तीव्रता से आया था और इसका केंद्र मोरीगांव ही था, जो ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे स्थित है। भूकंप की तीव्रता इतनी थी कि इसे केवल मोरीगांव में ही नहीं, बल्कि आस-पास के कई जिलों और पूर्वोत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी झटके के तौर पर महसूस किया गया। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी जगह से जान-माल के नुकसान की तत्काल कोई रिपोर्ट नहीं मिली है, जिससे राहत की स्थिति बनी हुई है।

भूकंप कब और कैसे आया?
जानकारी के अनुसार यह भूकंप सोमवार सुबह लगभग 4:17 बजे IST (भारतीय समय) पर आया। NCS ने बताया कि इस भूकंप का एपिसेंटर लगभग 50 किलोमीटर की गहराई पर था और इसका केन्द्र बिंदु 26.37° उत्तरी अक्षांश तथा 92.29° पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। हालांकि तीव्रता 5.1 मापी गई, यह किसी बड़े विनाशकारी भूकंप की तीव्रता नहीं मानी जाती, लेकिन यह सत्रह तक के उथले झटकों की श्रेणी में आता है, जो सतह पर जीने वाले लोगों को स्पष्ट रूप से महसूस होते हैं।

किस-किस जगह महसूस हुआ झटका?
मोदीगांव के अलावा आसपास के कई जिलों में रहती जनता ने भूकंप के झटके महसूस किए। इनमें शामिल हैं:

कामरूप मेट्रोपॉलिटन
नागांव
पूर्व और पश्चिम कार्बी आंगलोंग
होजई
दिमा हसाओ
गोलाघाट
जोरहाट

और कई अन्य इलाके।
भूकंप के झटके जलवायु परिस्थितियों के बीच आए — उस समय क्षेत्र में घने कोहरे और ठंड का मौसम था, जिससे लोगों को कुछ समय के लिए भय और आशंका का सामना करना पड़ा।

क्या यह अकेली घटना है या संकेत?
पूर्वोत्तर भारत भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है और समय-समय पर यहां छोटी-मोटी कंपन की घटनाएं दर्ज होती रहीं हैं। इसी तरह के झटके पिछले कुछ वर्षों में भी यहां महसूस किए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह क्षेत्र टेक्टोनिक प्लेटों के संपर्क पर स्थित होने की वजह से भूकंप की गतिविधि से प्रभावित रहता है।
इससे पहले भी मोरीगांव में भूकंप के झटके दर्ज हुए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों ने महसूस किया था लेकिन उसमें भी किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं आई थी।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
भूकंप के आने के समय कई लोग अपने घरों से बाहर निकल आए, कुछ ने अपने परिवार को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश की। शहर के अधिकांश निवासी जाग उठे और मोबाइल फोन पर शोर-शराबा शुरू हो गया कि क्या यह किसी बड़ा भूकंपीय संकट की शुरुआत है या केवल एक सामान्य झटका।कई लोगों ने बताया कि कंपन के झटके उतने स्पष्ट थे कि बिस्तर और फर्नीचर तक हिलते हुए महसूस हुए। कुछ ने तो तो देर तक कंपकंपी का अनुभव किया। इससे पता चलता है कि यह भूकंप स्थानीय स्तर पर पर्याप्त महसूस योग्य था , हालांकि उसमें नुकसान नहीं हुआ।

अधिकारियों की स्थिति क्या है?
सरकारी एजेंसियों और NCS ने कहा है कि फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में कोई बड़ा भूकंप आने वाला है। वे लगातार सेंसर और डाटा का विश्लेषण कर रहे हैं और किसी भी अतिरिक्त गतिविधि पर नजर रख रहे हैं।अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों तथा सोशल मीडिया की अटकलों पर ध्यान न दें और आधिकारिक सूचनाओं का ही इंतजार करें।

भूवैज्ञानिकों की क्या राय है?
भूवैज्ञानिकों के अनुसार, 5.1 तीव्रता के झटके हजारों किलोमीटर तक महसूस किए जा सकते हैं, खासकर यदि एपिसेंटर कम गहराई पर हो। पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्से पहले से ही भूकंपीय जोन V में आते हैं , इसका मतलब यह है कि यह क्षेत्र भूकंप के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है और बंदी-भारी झटके आने की संभावना बनी रहती है।
भूवैज्ञानिक विशेषज्ञ ऐसे झटकों को सतह के नीचे ऊर्जा के अचानक मुक्त होने का परिणाम मानते हैं, जो टेक्टोनिक प्लेटों के आपसी खिसकने या टकराने के कारण उत्पन्न होते हैं।

क्या आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है?
फिलहाल कोई आपात स्थिति नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को भूकंप के समय सुरक्षित रहने के तरीके जरूर सीख लेने चाहिए। उन्हें सलाह दी जाती है कि झटके आने पर खुले स्थान पर निकलें, भारी फर्नीचर या भूकंप में गिरने वाली वस्तुओं से दूरी बनाए रखें, और यदि झटके बहुत तेज हों तो दीवारों या मजबूत टेबल के पास सुरक्षित स्थान खोजें।मोरीगांव और उसके आसपास के हिस्सों में आए भूकंप के झटके ने सुबह की शांति को हरायमान बना दिया। हालांकि किसी जान-माल के नुकसान की रिपोर्ट नहीं आई, यह घटना फिर एक बार इस क्षेत्र की भूकंप संवेदनशीलता की ओर संकेत देती है।

Manvendra Somvanshi
Manvendra Somvanshi

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