2036 ओलंपिक की मेजबानी को तैयार भारत: काशी से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, खेल सुधारों से बदलती देश की तस्वीर
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संवाद 24 डेस्क।
भारत अब सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र ही नहीं, बल्कि वैश्विक खेल मंच पर नेतृत्व की भूमिका निभाने की ओर भी तेज़ी से अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से एक बड़ा और दूरगामी संदेश देते हुए स्पष्ट किया कि भारत वर्ष 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। यह घोषणा न केवल खेल जगत के लिए उत्साहजनक है, बल्कि देश की बदलती सोच, नीतियों और बुनियादी ढांचे की मजबूती को भी दर्शाती है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में आयोजित एक राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल प्रशासकों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है और वैश्विक आयोजनों की जिम्मेदारी उठाने के लिए हर दृष्टि से सक्षम बन चुका है। ओलंपिक जैसे महाआयोजन की मेजबानी केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि यह देश की व्यवस्थाओं, संसाधनों और संकल्प की परीक्षा होती है, जिसमें भारत खरा उतरने को तैयार है।
खेलों को लेकर बदली देश की सोच
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि बीते एक दशक में भारत में खेलों को लेकर सोच में ऐतिहासिक बदलाव आया है। पहले खेलों को केवल शौक या अतिरिक्त गतिविधि के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज खेल युवाओं के करियर, राष्ट्र की प्रतिष्ठा और आर्थिक विकास का अहम माध्यम बन चुके हैं। सरकार की नीतियों और समाज के समर्थन से आज खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेझिझक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया है। खेलो इंडिया अभियान, टैलेंट आइडेंटिफिकेशन प्रोग्राम, आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं ने भारतीय खिलाड़ियों को नई उड़ान दी है। आज भारत ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे आयोजनों में पहले से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
2036 ओलंपिक: एक सपना नहीं, लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2036 ओलंपिक की मेजबानी भारत के लिए केवल एक सपना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि देश का हर राज्य, हर शहर और हर नागरिक इस लक्ष्य को साकार करने में भागीदार बनेगा। भारत की युवा शक्ति, तकनीकी क्षमता और प्रशासनिक अनुभव इस दिशा में हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं।उन्होंने यह भी बताया कि भारत पहले ही कई अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सफल मेजबानी कर चुका है। जी-20 शिखर सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताएं और वैश्विक सांस्कृतिक कार्यक्रम इस बात का प्रमाण हैं कि भारत विश्वस्तरीय आयोजन करने में सक्षम है।
बुनियादी ढांचे में ऐतिहासिक सुधार
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते वर्षों में देश के खेल बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व सुधार हुए हैं। बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आधुनिक स्टेडियम, खेल परिसर और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए गए हैं। इससे न केवल खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिली हैं, बल्कि खेल संस्कृति भी जमीनी स्तर तक मजबूत हुई है।उन्होंने बताया कि आज भारत में ऐसे कई स्टेडियम और खेल परिसर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हैं। आने वाले वर्षों में इन सुविधाओं को और भी उन्नत किया जाएगा, ताकि 2036 ओलंपिक जैसे आयोजन की मेजबानी निर्बाध रूप से की जा सके।
खिलाड़ियों के सम्मान और आत्मविश्वास पर जोर
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में खिलाड़ियों के सम्मान को सर्वोपरि बताया। उन्होंने कहा कि सरकार खिलाड़ियों को केवल पदक जीतने की मशीन नहीं, बल्कि राष्ट्र का गौरव मानती है। पुरस्कार, सम्मान, आर्थिक सहायता और करियर सुरक्षा से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा है।उन्होंने यह भी कहा कि आज खिलाड़ी जानते हैं कि देश उनके साथ खड़ा है। यही कारण है कि वे दबाव में भी बेहतर प्रदर्शन कर पा रहे हैं और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
वाराणसी से वैश्विक संदेश
काशी की धरती से दिए गए इस संदेश को प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वाराणसी, जो भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी मानी जाती है, अब आधुनिक भारत के आत्मविश्वास और वैश्विक सोच का भी प्रतीक बनती जा रही है। प्रधानमंत्री का यह संबोधन दर्शाता है कि परंपरा और प्रगति साथ-साथ चल सकती हैं।
युवाओं के लिए नए अवसर
2036 ओलंपिक की संभावित मेजबानी से देश के युवाओं के लिए रोजगार और अवसरों के नए द्वार खुलेंगे। खेल प्रबंधन, पर्यटन, इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया और तकनीक जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवसर सृजित होंगे। इससे न केवल अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर भी मजबूत होगी।
विपक्ष और खेल विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक और खेल जगत में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई खेल विशेषज्ञों ने इसे दूरदर्शी सोच बताया है। उनका मानना है कि यदि अभी से ठोस योजना और निवेश किया जाए, तो भारत निश्चित रूप से ओलंपिक मेजबानी के लिए एक मजबूत दावेदार बन सकता है।
आगे की राह
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ओलंपिक मेजबानी की राह आसान नहीं है, लेकिन भारत चुनौतियों से डरने वाला देश नहीं है। उन्होंने सभी राज्यों, खेल संगठनों और निजी क्षेत्र से सहयोग की अपील की, ताकि यह राष्ट्रीय लक्ष्य साकार हो सके।उन्होंने विश्वास जताया कि जिस तरह भारत ने अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक और बुनियादी ढांचे में असंभव को संभव किया है, उसी तरह खेलों के क्षेत्र में भी नया इतिहास रचेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह बयान केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि भारत के बदलते आत्मविश्वास और वैश्विक भूमिका का संकेत है। 2036 ओलंपिक की मेजबानी की तैयारी भारत को न केवल खेल महाशक्ति बनाएगी, बल्कि विश्व मंच पर उसकी प्रतिष्ठा को भी नई ऊंचाई देगी। काशी से निकला यह संदेश आने वाले वर्षों में देश की खेल नीति और दिशा को तय करने वाला साबित हो सकता है।






